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Jagveer Singh
jaata hooñ rozaana koii kaam par ik laash lekar
jaata hooñ rozaana koii kaam par ik laash lekar | जाता हूँ रोज़ाना कोई काम पर इक लाश लेकर
- Jagveer Singh
जाता
हूँ
रोज़ाना
कोई
काम
पर
इक
लाश
लेकर
काम
को
तो
देखो
कंधे
लाश
को
उट्ठा
रखा
है
- Jagveer Singh
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ऐसी
ग़रीबी
देखी
है
बिन
सब्ज़ी
रोटी
खाई
है
और
क्या
बुरा
हो
सकता
है
हमने
ग़ज़ल
तक
बेची
है
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Jagveer Singh
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कुछ
लोगों
से
यूँँ
रिश्ता
मेरा
जैसे
छत
का
है
दीवारों
से
कल
मरने
वाला
तो
आज
मरे
मुर्दा
बेहतर
है
बीमारों
से
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पढ़े
हैं
शे'र
तेरे
गेसू
पर
मैंने
मेरे
शानों
को
हक़
है
बिखरे
ये
इन
पर
Jagveer Singh
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एक
ये
वक़्त
मेरे
ज़रा
बस
में
नइँ
और
तेरी
दी
घड़ी
पीछे
रह
जाती
है
हाल
तो
उसका
भी
मेरे
जैसा
है
अब
वो
भी
अब
नींद
की
गोलियाँ
खाती
है
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Jagveer Singh
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जो
मुद्दे
उलझे
सरकारों
से
वो
तय
होने
फिर
तलवारों
से
कुछ
लोगों
से
यूँँ
रिश्ता
मेरा
जैसे
छत
का
है
दीवारों
से
कल
मरने
वाला
तो
आज
मरे
मुर्दा
बेहतर
है
बीमारों
से
ये
ख़ूबी
है
जनता
राज
में
इक
जनता
लड़
जाती
दरबारों
से
दारू
बदले
चुनने
वालो
के
हालात
हो
गए
लाचारों
से
क़ुव्वत
क्या
है
मेरे
दुश्मन
की
मुझको
ख़तरा
है
गद्दारों
से
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Jagveer Singh
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