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Jagveer Singh
aisi ghareebi dekhi hai
aisi ghareebi dekhi hai | ऐसी ग़रीबी देखी है
- Jagveer Singh
ऐसी
ग़रीबी
देखी
है
बिन
सब्ज़ी
रोटी
खाई
है
और
क्या
बुरा
हो
सकता
है
हमने
ग़ज़ल
तक
बेची
है
- Jagveer Singh
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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उस
ने
वा'दा
किया
है
आने
का
रंग
देखो
ग़रीब
ख़ाने
का
Josh Malihabadi
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मुफ़लिसी
थी
और
हम
थे
घर
के
इकलौते
चराग़
वरना
ऐसी
रौशनी
करते
कि
दुनिया
देखती
Kashif Sayyed
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पहला
इश्क़
सफल
हो
जाए
यार
कहाँ
ये
मुमकिन
है
पहली
रोटी
गोल
बने
ये
तो
लगभग
नामुमकिन
है
Rituraj kumar
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भूख
है
तो
सब्र
कर,
रोटी
नहीं
तो
क्या
हुआ
आजकल
दिल्ली
में
है
ज़ेर-ए-बहस
ये
मुद्दआ
Dushyant Kumar
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ये
टूटी
चटाई
ये
मिटटी
का
बर्तन
हिकारत
से
नादान
क्या
देखता
है
गरीबी
मोहम्मद
के
घर
में
पली
है
मेरे
घर
का
सामान
क्या
देखता
है
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Anjuman rahi raza
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दो
दफ़ा
ग़ुस्सा
हुए
वो
एक
ग़लती
पर
मेरी
रात
की
रोटी
सवेरे
काम
में
लाई
गई
Tanoj Dadhich
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पराई
आग
पे
रोटी
नहीं
बनाऊँगा
मैं
भीग
जाऊँगा
छतरी
नहीं
बनाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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हसीं
ख़्वाबों
को
अपने
साथ
में
ढोती
हुई
आंँखे
बहुत
प्यारी
लगी
हमको
तेरी
सोती
हुई
आंँखे
मोहब्बत
में
ये
दो
क़िस्से
सुना
है
रोज़
होते
हैं
कभी
हँसता
हुआ
चेहरा
कभी
रोती
हुई
आंँखे
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Naimish trivedi
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सज़ा
कितनी
बड़ी
है
गाँव
से
बाहर
निकलने
की
मैं
मिट्टी
गूँधता
था
अब
डबलरोटी
बनाता
हूँ
Munawwar Rana
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महल
में
नहीं
गर
तो
बस्ती
में
मिलते
हक़ीक़त
नहीं
तो
कहानी
में
मिलते
ये
सर्दी
तो
तब
भारी
सर्दी
में
गिनते
तेरे
बाल
जब
मेरी
जर्सी
में
मिलते
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Jagveer Singh
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आँख
पर
नींद
भारी
है
दोस्त
रात
भर
की
उधारी
है
दोस्त
पूछा
किसने
तेरे
वास्ते
बोला
हमने
हमारी
है
दोस्त
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Jagveer Singh
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शे'र
कहने
अलावा
मेरे
हाथ
एक
बूढ़े
की
बैसाखी
भी
है
Jagveer Singh
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मेरी
डीपी
भले
चूम
ले
पर
तू
कभी
बात
भी
कर
लिया
कर
नाम
पूछा
किसी
ने
तिरा
जो
चीख़
कर
बोला
मैंने
सितमगर
पहले
नंबर
पे
तू
है
तिरे
बाद
आता
है
कोई
एडोल्फ़
हिटलर
इतना
भाया
मिरा
दुख
सभी
को
बोले
सुनकर
मुकर्रर
मुकर्रर
तेरी
बातें
है
प्यारी
तभी
तक
जब
तलक
तू
न
बोले
मगर
पर
पेट
ख़ाली
रहा
तो
ये
जाना
हिज्र
से
भारी
है
भूक
का
क़हर
हाए
ये
दुख
है
कितना
बड़ा
दुख
तन्हा
बिस्तर
मैं
और
ये
दिसंबर
प्यार
में
सीख
जीना
यूँँ
'जगवीर'
प्यार
पे
मर
न
तू
प्यार
में
मर
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Jagveer Singh
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एक
ये
वक़्त
मेरे
ज़रा
बस
में
नइँ
और
तेरी
दी
घड़ी
पीछे
रह
जाती
है
Jagveer Singh
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