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Jagveer Singh
she'r kehne alaava mere haath
she'r kehne alaava mere haath | शे'र कहने अलावा मेरे हाथ
- Jagveer Singh
शे'र
कहने
अलावा
मेरे
हाथ
एक
बूढ़े
की
बैसाखी
भी
है
- Jagveer Singh
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ऊपर
से
दिखती
है
जितनी
प्यारी
दुनिया
अंदर
उतनी
हिर्स-ओ-हवस
की
मारी
दुनिया
दुनिया
से
ऊपर
उठकर
दुनिया
देखूँ
तो
हैरत
होती
है
कितनी
बेचारी
दुनिया
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कितनी
उजलत
में
दुनिया
बनाई
ख़ुदा
कितने
बच्चों
को
दुख
मारे
गुब्बारे
हैं
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कभी
दुख
के
मारे
कभी
शाद
में
ये
आँखें
तरसती
तेरी
याद
में
जो
शायर
ग़म-ए-हिज्र
से
बच
गया
उसे
मुफ़लिसी
खा
गई
बाद
में
दुखी
होनी
थी
तेरी
बेटी
कभी
ज़मीं
पैसा
ही
देखा
दामाद
में
मेरी
रूह
में
ऐसे
उर्दू
बसी
बसे
माँ
का
दिल
जैसे
औलाद
में
तवज्जोह
मिले
इस
सुख़न
को
बहुत
अमाँ
वक़्त
लगता
है
ईजाद
में
महज़
पेट
भरती
है
मेरी
पगार
सुकूँ
मिलता
है
मुझको
बस
दाद
में
मेरी
शा'इरी
डगमगा
जाती
है
तेरी
याद
आती
है
तादाद
में
मोहब्बत
में
आबाद
का
सुख
नहीं
मोहब्बत
का
है
लुत्फ़
बर्बाद
में
तरीक़े
लगाए
थे
काफ़ी
मगर
वो
हर
बार
बोली
नहीं
बाद
में
लगा
दिल
परिंदे
का
सय्याद
से
लगा
सारा
ही
दश्त
फ़रियाद
में
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ज़मीन
पर
मनुष्य
को
ही
ख़तरा
है
मनुष्य
से
यहाँ-वहाँ
मनुष्य
डरता
फिरता
है
मनुष्य
से
ख़ुदा
ने
भूक
और
मनुष्य
ने
बनाया
इश्क़
को
ख़ुदा
का
काम
ज़्यादा
जानलेवा
है
मनुष्य
से
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धीरे
धीरे
उनके
पहलू
आए
हैं
आप
से
तुम
तुम
से
वो
तू
आए
हैं
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