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Jagveer Singh
sikandar ho akbar ya hitler
sikandar ho akbar ya hitler | सिकंदर हो अकबर या हिटलर
- Jagveer Singh
सिकंदर
हो
अकबर
या
हिटलर
गए
ख़ाली
सब
लौटकर
घर
ज़मीं
जीतने
निकले
थे
वो
जो
लेटे
ज़मीं
में
ही
गढ़कर
बुरा
क्या
है
दारू
में
आख़िर
फलों
के
बढ़े
दाम
सड़कर
फ़क़ीरी
का
अपना
मज़ा
है
रज़ाई
फ़लक
फ़र्श
बिस्तर
मैं
तुम
में
ही
तो
जीता
हूँ
जाँ
कभी
देखो
मैं
से
उतरकर
- Jagveer Singh
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वो
क़हर
था
कि
रात
का
पत्थर
पिघल
पड़ा
क्या
आतिशीं
गुलाब
खिला
आसमान
पर
Zafar Iqbal
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ज़मीं
मेरे
सज्दे
से
थर्रा
गई
मुझे
आसमाँ
से
पुकारा
गया
Siraj Faisal Khan
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तू
शाही
है
परवाज़
है
काम
तेरा
तिरे
सामने
आ
समाँ
और
भी
हैं
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Allama Iqbal
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देख
कैसे
धुल
गए
है
गिर्या-ओ-ज़ारी
के
बाद
आसमाँ
बारिश
के
बाद
और
मैं
अज़ादारी
के
बाद
इस
सेे
बढ़
कर
तो
तुझे
कोई
हुनर
आता
नहीं
सोचता
हूँ
क्या
करेगा
दिल
आज़ारी
के
बाद
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Abbas Tabish
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तू
शाहीं
है
परवाज़
है
काम
तेरा
तेरे
सामने
आसमाँ
और
भी
हैं
Allama Iqbal
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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कभी
किसी
को
मुकम्मल
जहाँ
नहीं
मिलता
कहीं
ज़मीन
कहीं
आसमाँ
नहीं
मिलता
Nida Fazli
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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ऐ
आ
समाँ
किस
लिए
इस
दर्जा
बरहमी
हम
ने
तो
तिरी
सम्त
इशारा
नहीं
किया
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Ambreen Haseeb Ambar
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मुझे
मालूम
है
उस
का
ठिकाना
फिर
कहाँ
होगा
परिंदा
आसमाँ
छूने
में
जब
नाकाम
हो
जाए
Bashir Badr
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हद
से
ज़्यादा
कर
चुका
है
बदतमीज़ी
वो
भी
मुझ
से
कर
रहा
है
बदतमीज़ी
लड़कियों
लोहे
से
ही
कटता
है
लोहा
बदतमीज़ी
का
सिला
है
बदतमीज़ी
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Jagveer Singh
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यारों
नेताओं
की
बेटी
है
ये
मुहब्बत
सारी
क़स
में
झूठी
सारे
वादे
झूठे
यार
बिना
आधी
दुनिया
लक़वा
लगती
है
जग
रूठे
तो
रूठे
जिगरी
यार
न
रूठे
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Jagveer Singh
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रोटी
तुम
सेे
थोड़ी
जलती
है
थोड़ी
तुम
सेे
रोटी
जलती
है
Jagveer Singh
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सच
कहने
से
पहले
इतराते
थे
जब
तेरे
नाम
की
क़सम
खाते
थे
एक
गली
देखी
तो
आया
ये
याद
एक
पते
पर
मेरे
ख़त
जाते
थे
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Jagveer Singh
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इश्क़
नामी
जो
इक
चीज़
है
दोस्ती
उसकी
दहलीज़
है
शा'इरी
की
अलग
बात
है
वर्ना
शायर
तो
नाचीज़
है
सोच
हम
जैसे
काफ़िर
का
दुख
तेरा
क्या
तू
तो
तफ़्वीज़
है
रिंद
हूँ
पर
हूँ
औलाद
भी
माँ
के
हाथों
का
तावीज़
है
छोड़
दे
हम
तसव्वुर
अगर
फिर
ख़ुदा
तू
भी
क्या
चीज़
है
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Jagveer Singh
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