ख़ंजर वही है ख़ूॅं का तलबगार नया है

  - Jaffer Imam
ख़ंजरवहीहैख़ूॅंकातलबगारनयाहै
सबज़ुल्मपुरानेहैंबसअख़बारनयाहै
हररोज़नयारंगदिखाताहैवोअपना
वोशख़्समेरेसाथलगातारनयाहै
तालाबमेंकुछरोज़सेलाशेंनहींआईं
लगताहैकिगाँवकाज़मींदारनयाहै
हमलोगमुहाज़िरहैंजिन्हेंकोईजाने
हरदूसरीबरसातमेंघर-बारनयाहै
तुमकोअभीहरबातमेरीअच्छीलगेगी
कुछरोज़गुज़रनेदोअभीप्यारनयाहै
मालूमहैयेशख़्सभीमेरानहींहोगा
नाटकतोपुरानाहैकलाकारनयाहै
  - Jaffer Imam
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