दोस्त मालूम था इक दिन तू पराई होगी

  - Jaffer Imam
दोस्तमालूमथाइकदिनतूपराईहोगी
परयेसोचाथाइसतरहजुदाईहोगी
क्याहुआहोगातेरेजानेसेयेयादनहीं
इतनातयहैकिमेरीआँखभरआईहोगी
आसमानोंमेंबनेजोड़ेबिछड़जाएँगे
ज़ख़्मखाएहुएलोगोंकीसगाईहोगी
रेगज़ारोंपेकईचाँदचमकतेहोंगे
शबमेंसरदारनेजबशमअबुझाईहोगी
मेरीबे-वक़्ततरक़्क़ीसेमेरेअपनोंके
दिलमेंअफ़सोसमगरलबपेबधाईहोगी
ज़िंदगीअपनीचमकदारबनानेकेलिए
आजसेरोज़मुक़द्दरकीघिसाईहोगी
  - Jaffer Imam
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