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jaani Aggarwal taak
hamko bhi ab ik bimaari lag gayi
hamko bhi ab ik bimaari lag gayi | हमको भी अब इक बिमारी लग गई
- jaani Aggarwal taak
हमको
भी
अब
इक
बिमारी
लग
गई
जबसे
ये
आदत
तुम्हारी
लग
गई
ख़ूब-सूरत
इक
दफा
जो
कह
दिया
जान
तुमपे
पहरेदारी
लग
गई
- jaani Aggarwal taak
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दो
तुंद
हवाओं
पर
बुनियाद
है
तूफ़ाँ
की
या
तुम
न
हसीं
होते
या
में
न
जवाँ
होता
Arzoo Lakhnavi
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बनाने
को
अमाँ
मैं
भी
बना
देता
हज़ारों,
पर
बहानों
से
कहीं
ज़्यादा
मुझे
मंज़िल
थी
ये
प्यारी
Sandeep dabral 'sendy'
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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सभी
के
दीप
सुंदर
हैं
हमारे
क्या
तुम्हारे
क्या
उजाला
हर
तरफ़
है
इस
किनारे
उस
किनारे
क्या
Hafeez Banarasi
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किस
लिए
देखती
हो
आईना
तुम
तो
ख़ुद
से
भी
ख़ूब-सूरत
हो
Jaun Elia
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हसीन
यादों
के
चाँद
को
अलविदा'अ
कह
कर
मैं
अपने
घर
के
अँधेरे
कमरों
में
लौट
आया
Hasan Abbasi
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सारी
तेरी
मर्ज़ी
है
पर,
दिल
में
है
एक
बात
कहूँ
ज़ुल्फ़ें
इतनी
सुंदर
हो
तो,
बाँधी
थोड़ी
जाती
है
Prashant Sharma Daraz
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लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
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Vikram Gaur Vairagi
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ख़्वाब
इतना
भी
हसीं
मत
देखो
नींद
टूटे
तो
न
ये
शब
गुज़रे
anupam shah
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हसीं
ख़्वाबों
को
अपने
साथ
में
ढोती
हुई
आंँखे
बहुत
प्यारी
लगी
हमको
तेरी
सोती
हुई
आंँखे
मोहब्बत
में
ये
दो
क़िस्से
सुना
है
रोज़
होते
हैं
कभी
हँसता
हुआ
चेहरा
कभी
रोती
हुई
आंँखे
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Naimish trivedi
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ये
तुम
किस
की
तमन्ना
कर
रहे
हो
जो
हम
को
ही
पराया
कर
रहे
हो
वो
मुड़
कर
अब
नहीं
देखेगी
तुमको
फ़क़त
तुम
वक़्त
ज़ाया'
कर
रहे
हो
ये
दुनिया
नोच
खाएगी
तुम्हें
भी
कि
जिसके
साथ
अच्छा
कर
रहे
हो
भरोसा
करना
अच्छी
बात
है
पर
किसी
पर
भी
भरोसा
कर
रहे
हो
मुहब्बत
अब
न
हो
पाएगी
हम
से
तुम
इक
मुर्दे
को
ज़िंदा
कर
रहे
हो
नहीं
हमदर्द
कोई
भी
किसी
का
भला
तुम
क्यूँ
दिखावा
कर
रहे
हो
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jaani Aggarwal taak
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चंद
लफ़्ज़ों
ने
बाँध
रक्खा
है
और
वो
ये
तुम्हें
क़सम
मेरी
jaani Aggarwal taak
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ख़ुशियों
से
भी
मेरा
पाला
पड़
रक्खा
ग़म
की
हर
सौग़ात
समझ
में
आती
है
jaani Aggarwal taak
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रूठ
कर
मुझ
से
जा
रहे
हो
तुम
या
बहाना
बना
रहे
हो
तुम
दोस्त
मुझ
को
बना
लिया
तुम
नें
प्यार
किस
को
बना
रहे
हो
तुम
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jaani Aggarwal taak
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भटकता
फिर
रहा
दर
दर
किसी
की
कहानी
जानता
हूँ
हर
किसी
की
बिछड़ते
वक़्त
जो
रो
कर
गई
थी
वो
दुल्हन
बन
गई
हँस
कर
किसी
की
कहीं
बेरोज़गारी
छा
रही
है
बनी
है
ज़िन्दगी
दफ़्तर
किसी
की
मुहब्बत
ख़ुश-नसीबों
की
मुकम्मल
अधूरी
रह
गई
है
पर
किसी
की
छुपाए
छुप
न
पाएगा
ये
पहलू
कि
याद
आती
मुझे
अक्सर
किसी
की
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jaani Aggarwal taak
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