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jaani Aggarwal taak
in
in | इन
- jaani Aggarwal taak
इन
में
थोड़ा
ग़म
रहने
दो
आँख
हमारी
नम
रहने
दो
उनकी
याद
दिलाता
है
ये
सर्दी
का
मौसम
रहने
दो
उनकी
एक
निशानी
है
बस
घाव
बिना
मरहम
रहने
दो
हमको
सब
मालूम
है
जानी
तुम
में
कितना
दम
रहने
दो
- jaani Aggarwal taak
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मुझे
मंज़ूर
फ़ुर्क़त
दे
सनम
जिसे
चाहे
मुहब्बत
दे
सनम
मैं
तेरे
वास्ते
क्या
बन
गया
मुझे
थोड़ी
तो
इज़्ज़त
दे
सनम
पुराने
फूल
अब
किस
काम
के
नये
महबूब
को
ख़त
दे
सनम
दिया
जो
रंज-ओ-ग़म
तूने
मुझे
ख़ुदा
तुझ
को
भी
क़ुर्बत
दे
सनम
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उसका
चेहरा
याद
नहीं
कुछ
भी
अच्छा
याद
नहीं
बैठ
गया
हूँ
महफ़िल
में
अपना
लिक्खा
याद
नहीं
सोच
रहा
हूँ
घंटों
से
मुझ
को
क्या-क्या
याद
नहीं
फ़क़त
बिछड़ना
याद
रहा
अव्वल
मिलना
याद
नहीं
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बन
सँवर
के
दरमियाँ
जब
आई
तुम
फिर
नज़र
तुमको
हमारी
लग
गई
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कभी
तो
दिया
था
सहारा
किसी
ने
न
मुड़कर
के
देखा
दुबारा
किसी
ने
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हमारी
ही
तरह
बर्बाद
होते
तो
ये
मिसरे
ग़म
के
उन
को
याद
होते
तो
बस
इक
दिन
ये
ख़याल
आया
मिरे
मन
में
सभी
'आशिक़
अगर
जल्लाद
होते
तो
हमारे
इश्क़
में
वो
सिरफिरा
होता
हम
उसके
इश्क़
में
बग़दाद
होते
तो
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