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Chandan Sharma
tujh se itnaa hi hai bas aas mujhe
tujh se itnaa hi hai bas aas mujhe | तुझ से इतना ही है बस आस मुझे
- Chandan Sharma
तुझ
से
इतना
ही
है
बस
आस
मुझे
तू
बना
ले
तेरा
लिबास
मुझे
मैं
नहीं
वो
है
जिस
की
आस
तुम्हें
तुम
नहीं
वो
जो
आए
रास
मुझे
दरमियाँ
अपने
कोई
रब्त
नहीं
फिर
भी
तू
है
बहुत
ही
खास
मुझे
उसकी
ये
ख़ामुशी
उसे
शायद
देखना
हो
कहीं
उदास
मुझे
मैं
मुयस्सर
तो
था
सभी
को
मगर
ना
मिला
कोई
मेरे
पास
मुझे
मुझ
को
अच्छे
से
जानने
वाले
कहते
हैं
एक
ग़म-शनास
मुझे
कर
रहा
मैं
क्या
जा
रहा
हूँ
कहाँ
है
नहीं
कुछ
होश-ओ-हवा
से
मुझे
आसमाँ
से
कहो
कि
प्यार
भेजे
मैं
ज़मीं
हूँ
लगी
है
प्यास
मुझे
बाद
पढ़ने
के
मुझ
को
समझे
भी
चाहिए
इक
सुख़न-शनास
मुझे
इक
ज़रा
शाद
ने
ली
जाँ
"जाज़िब"
ग़म
नहीं
कर
सका
खलास
मुझे
- Chandan Sharma
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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मैं
होश-मंद
हूँ
ख़ुद
भी
सो
मेरी
ग़ज़लों
में
न
रक़्स
करता
है
'आशिक़
न
बाल
खींचता
है
Charagh Sharma
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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बस
यूँँ
ही
मेरा
गाल
रखने
दे
मेरी
जान
आज
गाल
पर
अपने
Jaun Elia
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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जान
लेना
कि
नया
हाथ
बुलाता
है
तुम्हें
गर
कोई
हाथ
छुड़ाए
तो
छुड़ाने
देना
Ameer Imam
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न
खाओ
क़स
में
वग़ैरा
न
अश्क
ज़ाया'
करो
तुम्हें
पता
है
मेरी
जान
हक़-पज़ीर
हूँ
मैं
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Amaan Haider
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अजीब
हालत
है
जिस्म-ओ-जाँ
की
हज़ार
पहलू
बदल
रहा
हूँ
वो
मेरे
अंदर
उतर
गया
है
मैं
ख़ुद
से
बाहर
निकल
रहा
हूँ
Azm Shakri
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तुम्हें
हुस्न
पर
दस्तरस
है
मोहब्बत
वोहब्बत
बड़ा
जानते
हो
तो
फिर
ये
बताओ
कि
तुम
उस
की
आँखों
के
बारे
में
क्या
जानते
हो
ये
जुग़राफ़िया
फ़ल्सफ़ा
साईकॉलोजी
साइंस
रियाज़ी
वग़ैरा
ये
सब
जानना
भी
अहम
है
मगर
उस
के
घर
का
पता
जानते
हो
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Tehzeeb Hafi
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हज़रत
ए
नासेह
कहते
हैं
मुहब्बत
मार
देगी
इश्क़
कहता
है
मुहब्बत
को
तिज़ारत
मार
देगी
और
गुलचीं
तो
करेगा
बारहा
यूँँ
ग़ारत
ए
गुल
इन
गुलों
को
यार
गुलचीं
की
रफ़ाक़त
मार
देगी
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Chandan Sharma
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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डर
है
मुझ
को
मिरे
क़रीब
आ
कर
अपने
अरमाँ
कहीं
जला
न
दे
तू
Chandan Sharma
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कभी
मिलता
नहीं
क्यूँ
मुझ
को
मुझ
में
कहाँ
है
गर
मेरे
अंदर
ख़ुदा
है
भटकती
है
कहीं
और
ही
मेरी
रूह
बदन
मेरा
कहीं
और
ही
पड़ा
है
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Chandan Sharma
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है
निगाहों
में
बसा
कोई
,कोई
और
दिल
में
है
देखना
है
ये
कि
आख़िर
कौन
मुस्तक़बिल
में
है
आँखों
से
आँखें
लड़ा
वो
जाने
क्या
क्या
कह
गई
ख़ामुशी
छाई
ज़बाँ
पर
जान
भी
मुश्किल
में
है
मर
के
भी
जीना
उसी
ने
तो
सिखाया
है
मुझे
जीते
जी
ही
मार
देने
का
हुनर
क़ातिल
में
है
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Chandan Sharma
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