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AYUSH SONI
subah akhbaaron men aaya desh men daulat bahut hai
subah akhbaaron men aaya desh men daulat bahut hai | सुब्ह अखबारों में आया देश में दौलत बहुत है
- AYUSH SONI
सुब्ह
अखबारों
में
आया
देश
में
दौलत
बहुत
है
फिर
भी
जाने
क्यूँँ
यहाँ
पर
लोग
मरते
मुफ़्लिसी
में
- AYUSH SONI
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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मुफ़लिसी
थी
और
हम
थे
घर
के
इकलौते
चराग़
वरना
ऐसी
रौशनी
करते
कि
दुनिया
देखती
Kashif Sayyed
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शराब
खींची
है
सब
ने
ग़रीब
के
ख़ूँ
से
तू
अब
अमीर
के
ख़ूँ
से
शराब
पैदा
कर
तू
इंक़लाब
की
आमद
का
इंतिज़ार
न
कर
जो
हो
सके
तो
अभी
इंक़लाब
पैदा
कर
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Asrar Ul Haq Majaz
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तुम
भी
रोती
हुई
दिखाई
दो
मैंने
रोते
हुए
ये
चाहा
था
Vikas Rana
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पहली
ग़लती
पर
मत
छोड़ो
मुझको
तुम
पहली
रोटी
गोल
नहीं
बनती
जानाँ
Tanoj Dadhich
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न
जाने
कौन
सी
दौलत
अता
करता
है
रब
इनको
किसी
भी
बाप
को
मुफ़्लिस
कभी
देखा
नहीं
मैंने
Saheb Shrey
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भूख
है
तो
सब्र
कर,
रोटी
नहीं
तो
क्या
हुआ
आजकल
दिल्ली
में
है
ज़ेर-ए-बहस
ये
मुद्दआ
Dushyant Kumar
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हसीं
ख़्वाबों
को
अपने
साथ
में
ढोती
हुई
आंँखे
बहुत
प्यारी
लगी
हमको
तेरी
सोती
हुई
आंँखे
मोहब्बत
में
ये
दो
क़िस्से
सुना
है
रोज़
होते
हैं
कभी
हँसता
हुआ
चेहरा
कभी
रोती
हुई
आंँखे
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Naimish trivedi
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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जन्मदिन
पर
भी
मुझे
वो
याद
अब
करता
नहीं
इस
ज़माने
में
कोई
इतना
भी
मुफ़्लिस
होगा
क्या
Harsh saxena
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मेरे
हम
उम्र
साथी
इश्क़
में
गर
टूट
जाए
दिल
ग़म-ए-हिज्राँ
में
इक
महफ़िल
सजाना,
शा'इरी
करना
AYUSH SONI
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और
क्या
माँगूँ
ख़ुदास
जो
दिया
अच्छा
दिया
है
इक
मकाँ
है,
साथ
तू
है
बस
यही
तो
ज़िंदगी
है
AYUSH SONI
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काश
ऐसी
गर्दिश-ए-तक़दीर
होती
साथ
तेरे
मेरी
इक
तस्वीर
होती
AYUSH SONI
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गर
मुझे
भी
मार
देना
चाहते
हो
पहले
मेरी
ख़्वाहिशों
को
मार
देना
AYUSH SONI
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कहीं
पर
भूख
से
वो
मर
गया
रोता
हुआ
सियासत
कह
रही
इक
मर
गया
तो
क्या
हुआ
ज़बाँ
कितनों
की
सिल
देगी
हुक़ूमत
अब
यहाँ
मैं
तुमको
रोज़
मिल
जाऊँगा
यूँँ
गाता
हुआ
बग़ावत
की
ख़बर
सुनकर
ही
हम
घबरा
गए
वहाँ
मज़लिस
में
कोई
कह
रहा
अच्छा
हुआ
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AYUSH SONI
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