ghaur se ham ek chehra sochte hain | ग़ौर से हम एक चेहरा सोचते हैं

  - Ajay Kumar
ग़ौरसेहमएकचेहरासोचतेहैं
उसकीआँखोंकातमाशासोचतेहैं
मैंज़रासाएकमतलासोचताहूँ
लोगउस
मेंदर्दअपनासोचतेहैं
जबमुसलसलसोचनेकीहोरिवायत
तोवहाँपरलोगसबकासोचतेहैं
एकतोतस्वीरपोशीदारखीहै
औरअक्सरउसकाक़िस्सासोचतेहैं
सबरक़ीबोंपरतरसआताहैमुझको
रातभरउसबे-वफ़ाकासोचतेहैं
लोगोंकाअंदाज़कारोबारकाहै
औरहमकम-बख़्तसादासोचतेहैं
जोभीचारोंऔरसोचाजारहाहै
हमउसीदुनियाकेजैसासोचतेहैं
अबमुझेभीसोचनापड़ताहैअक्सर
आपनेभीतोकहाथासोचतेहैं
जिनउजालोंकीतबाहीरातकोहै
वोउजालेरातकोक्यासोचतेहैं
कुछदिसम्बरकेनज़ारेलेरहेहैं
कुछअभीसेजनवरीकासोचतेहैं
  - Ajay Kumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy