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Kumar gyaneshwar
hosh sabke thikaane lagenge
hosh sabke thikaane lagenge | होश सबके ठिकाने लगेंगे
- Kumar gyaneshwar
होश
सबके
ठिकाने
लगेंगे
इश्क़
जब
आज़माने
लगेंगे
तुमको
भी
लगता
है
सब
नया
कुछ
तुमको
भी
सब
पुराने
लगेंगे
बाप
की
क़द्र
आती
समझ
तब
बेटे
जब
ख़ुद
कमाने
लगेंगे
यूँँ
समझने
की
हमको
न
सोचो
तुमको
इस
में
ज़माने
लगेंगे
देख
ले
कोई
आँखें
तुम्हारी
आग
दरिया
बुझाने
लगेंगे
उसके
छू
लेने
के
बाद
यारों
ज़ख़्म
सारे
सुहाने
लगेंगे
उस
गली
में
जहाँ
घर
तुम्हारा
लोग
सजदे
को
जाने
लगेंगे
जितनी
आसानी
से
खुलते
थे
हम
उतने
अब
शाख़साने
लगेंगे
- Kumar gyaneshwar
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दरिया
के
किनारे
पे
मिरी
लाश
पड़ी
थी
और
पानी
की
तह
में
वो
मुझे
ढूँड
रहा
था
Adil Mansuri
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एक
दरिया
है
यहाँ
पर
दूर
तक
फैला
हुआ
आज
अपने
बाजुओं
को
देख
पतवारें
न
देख
Dushyant Kumar
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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सदा
लपेट
के
दिल
जाएँगे
वगरना
नहीं
पहाड़
आह
से
हिल
जाएँगे
वगरना
नहीं
वो
आज
दरिया
से
लड़ने
की
ठान
कर
गए
थे
कहीं
किनारे
पे
मिल
जाएँगे
वगरना
नहीं
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Nadeem Bhabha
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वो
इतना
शांत
दरिया
था
मगर
जब
गया
तो
ले
गया
सब
कुछ
बहा
के
Siddharth Saaz
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उसी
वक़्त
अपने
क़दम
मोड़
लेना
नदी
पार
से
जब
इशारा
करूँँगा
Siddharth Saaz
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बस
टूटी
कश्ती
ही
बतला
सकती
है
इक
दरिया
की
कितनी
शक्लें
होती
हैं
Soubhari Deepesh Sharma
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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वक़्त
देना
था
जो
ज़िन्दगी
को
दे
रहे
हैं
वो
सब
नौकरी
को
उसने
तसवीर
भेजी
थी
अपनी
इतना
काफ़ी
था
मेरी
ख़ुशी
को
मैं
मोहब्बत
के
लायक
नहीं
हूँ
कौन
समझेगा
इस
बेबसी
को
बेटी
ही
माँगी
उसने
ख़ुदास
रौशनी
चाहिए
तीरगी
को
लौट
आने
का
मतलब
वो
जाने
जो
गया
हो
कभी
ख़ुद-कुशी
को
जिस्म
ही
चाहता
हूँ
अ
गर
मैं
आग
लग
जाए
इस
तिश्नगी
को
इश्क़
करने
से
पहले
ये
समझो
जानना
पड़ता
है
सादगी
को
क्या
नहीं
दुनिया
में
अब
तुम्हारे
और
क्या
चाहिए
आदमी
को
एक
चेहरा
बना
कर
ख़ुदा
ने
छोड़
डाला
है
कारीगरी
को
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Kumar gyaneshwar
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रंग
लाल
और
इक
अदा-ए-ख़ास
चेहरा
जी
रहा
है
देखकर
जिसे
उदास
चेहरा
क्यूँ
करें
ग़मो
का
ज़िक्र
अब
किसी
के
पास
हम
साथ
है
मिरे
जो
एक
ग़म
शनास
चेहरा
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Kumar gyaneshwar
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कोई
इस
दर्जा
न
हो
आसान
मुझ
पर
यूँँ
लगे
अब
हो
रहा
एहसान
मुझ
पर
एक
रिश्ता
एक
वा'दा
एक
लड़की
बस
हुआ
इतनों
का
ही
नुक़्सान
मुझ
पर
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Kumar gyaneshwar
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ध्यान
जब
से
हमारा
तुम्हारी
तरफ़
फिर
रहा
मारा
मारा
तुम्हारी
तरफ़
कोई
है
भी
जिसे
अपना
कहती
हो
तुम
कोई
है
भी
तुम्हारा
तुम्हारी
तरफ़
ख़ूब-सूरत
है
दुनिया
में
गर
कोई
शय
समझो
उसका
इशारा
तुम्हारी
तरफ़
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Kumar gyaneshwar
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साथ
मेरे
जो
हादसा
हुआ
है
कौन
सा
पहली
मर्तबा
हुआ
है
होता
है
सब
के
साथ
इश्क़
में
जो
हक़
में
मेरे
वो
फ़ैसला
हुआ
है
वो
मोहब्बत
की
बातें
करती
है
अब
साथ
उसके
भी
कुछ
बुरा
हुआ
है
रूह
का
रास्ता
बदन
नहीं
बस
तजरबा
मैंने
ये
किया
हुआ
है
लड़ता
है
जंग
जो
अकेले
कभी
उसके
ही
हिस्से
काफ़िला
हुआ
है
एक
लड़की
ने
फिर
से
चाहा
मुझे
दोस्त
मतलब
कि
मसअला
हुआ
है
मेरा
बस
एक
मशवरा
है
उसे
भूल
जाओ
कि
राब्ता
हुआ
है
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Kumar gyaneshwar
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