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Rohit Gustakh
kise maaloom tha kya kar chuka tha main
kise maaloom tha kya kar chuka tha main | किसे मालूम था क्या कर चुका था मैं
- Rohit Gustakh
किसे
मालूम
था
क्या
कर
चुका
था
मैं
मुझे
जब
होश
आया
मर
चुका
था
मैं
- Rohit Gustakh
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ये
भी
मशहूर
था
कूचे
में
उस
के
जिसे
तुम
लोग
पागल
कह
रहे
हो
Rohit Gustakh
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दबाती
है
गला
मेरा
ख़मोशी
उदासी
झाँकती
है
खिड़कियों
से
Rohit Gustakh
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हर
पल
इक
पागल
की
ख़ातिर
ख़्वाब
सजाये
कल
की
ख़ातिर
जिस
पल
में
जीनी
थीं
सदियाँ
आया
वो
इक
पल
की
ख़ातिर
बेच
गिटार
हुआ
दीवाना
तेरी
इस
पायल
की
ख़ातिर
ले
आए
दिल
बुनकर
अपना
सर्दी
में
कम्बल
की
ख़ातिर
ठुकरा
दी
है
जग
की
दौलत
इक
तेरे
आँचल
की
ख़ातिर
ग़ालिब
की
गलियों
में
हम
भी
भटके
नज़्म
ग़ज़ल
की
ख़ातिर
क़ैद
किया
वारिद
को
हमने
आज
तिरे
काजल
की
ख़ातिर
रहती
है
अनबन
पेड़ों
में
उस
मीठी
कोयल
की
ख़ातिर
मोड़
लिया
मुँह
सब
रागों
से
नदियों
की
कल
कल
की
ख़ातिर
ज़ुल्म
सहे
कीचड़
के
हमने
उस
महबूब
कमल
की
ख़ातिर
किसको
अपना
समझे
धरती
जोगिन
है
बादल
की
ख़ातिर
आज
हुई
दिल
से
गुस्ताख़ी
छोड़
दिया
सब
कल
की
ख़ातिर
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Rohit Gustakh
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चूमकर
ज़ख़्म
फिर
से
हरा
कर
दिया
क्या
लगा
था
तुम्हें
मोजिज़ा
कर
दिया
आपके
इश्क़
का
क़र्ज़
था
मुझपे
जो
काटकर
हिज्र
की
शब
अदा
कर
दिया
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Rohit Gustakh
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जबसे
बोला
उसने
हाए
मुहब्बत
से
ली
फिर
दीवानों
की
राय
मुहब्बत
से
आते
देख
छुपा
करती
थी
जो
लड़की
उसने
आज
पिलाई
चाय
मुहब्बत
से
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Rohit Gustakh
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