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Rohit Gustakh
kinaara kar liya achha kiya pyaare
kinaara kar liya achha kiya pyaare | किनारा कर लिया अच्छा किया प्यारे
- Rohit Gustakh
किनारा
कर
लिया
अच्छा
किया
प्यारे
मुहब्बत
नाम
है
उसका
डुबा
देती
- Rohit Gustakh
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देख
मोहब्बत
का
दस्तूर
तू
मुझ
से
मैं
तुझ
से
दूर
कोशिश
लाज़िम
है
प्यारे
आगे
जो
उसको
मंज़ूर
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Nasir Kazmi
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ये
ज़माना
ये
दौर
कुछ
भी
नहीं
बस
मोहब्बत
है
और
कुछ
भी
नहीं
Vishal Singh Tabish
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मोहब्बत
के
इक़रार
से
शर्म
कब
तक
कभी
सामना
हो
तो
मजबूर
कर
दूँ
Akhtar Shirani
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यार
तेरी
मुझे
ज़रूरत
है
इक
तू
ही
तो
मेरी
मुहब्बत
है
Arohi Tripathi
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मैं
उस
से
भीख
माँगूं
तो
मोहब्बत
मिल
भी
सकती
है
मगर
कहती
है
ख़ुद्दारी
मोहब्बत
भीख
की
और
तू
Shadab Asghar
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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प्यार
मुहब्बत
बाद
की
बातें
जान
कभी
ये
सोचा
है
किसने
तेरा
साथ
दिया
था
कौन
नशे
में
ख़त्म
हुआ
Vikram Gaur Vairagi
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इक
बार
अपनी
माँ
को
मोहब्बत
से
देख
ले
जिसको
भी
हुस्न-ए-ताम
का
मतलब
नहीं
पता
Rohit tewatia 'Ishq'
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मोहब्बत
नेक-ओ-बद
को
सोचने
दे
ग़ैर-मुमकिन
है
बढ़ी
जब
बे-ख़ुदी
फिर
कौन
डरता
है
गुनाहों
से
Arzoo Lakhnavi
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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भले
दुनिया
जला
डाले
मदारी
तुम्हें
तो
बस
तमाशा
देखना
है
Rohit Gustakh
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ज़िन्दगी
हो
मुबारक
तुम्हारी
तुम्हें
मौत
ने
आसरा
दे
दिया
है
हमें
Rohit Gustakh
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हर
पल
इक
पागल
की
ख़ातिर
ख़्वाब
सजाये
कल
की
ख़ातिर
जिस
पल
में
जीनी
थीं
सदियाँ
आया
वो
इक
पल
की
ख़ातिर
बेच
गिटार
हुआ
दीवाना
तेरी
इस
पायल
की
ख़ातिर
ले
आए
दिल
बुनकर
अपना
सर्दी
में
कम्बल
की
ख़ातिर
ठुकरा
दी
है
जग
की
दौलत
इक
तेरे
आँचल
की
ख़ातिर
ग़ालिब
की
गलियों
में
हम
भी
भटके
नज़्म
ग़ज़ल
की
ख़ातिर
क़ैद
किया
वारिद
को
हमने
आज
तिरे
काजल
की
ख़ातिर
रहती
है
अनबन
पेड़ों
में
उस
मीठी
कोयल
की
ख़ातिर
मोड़
लिया
मुँह
सब
रागों
से
नदियों
की
कल
कल
की
ख़ातिर
ज़ुल्म
सहे
कीचड़
के
हमने
उस
महबूब
कमल
की
ख़ातिर
किसको
अपना
समझे
धरती
जोगिन
है
बादल
की
ख़ातिर
आज
हुई
दिल
से
गुस्ताख़ी
छोड़
दिया
सब
कल
की
ख़ातिर
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Rohit Gustakh
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होंठ
तबस्सुम
से
गीले
हैं
जानाँ
यानी
तुमने
कुछ
मीठा
सोचा
है
Rohit Gustakh
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ग़म-ए-दुनिया
से
आगे
कुछ
नहीं
है
जहाँ
तुम
आशनाई
कर
रही
हो
Rohit Gustakh
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