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Govind kumar
zinda-dil log bhi aise men rote hain
zinda-dil log bhi aise men rote hain | ज़िंदा-दिल लोग भी ऐसे में रोते हैं
- Govind kumar
ज़िंदा-दिल
लोग
भी
ऐसे
में
रोते
हैं
जब
किसी
अपने
को
वो
कहीं
खोते
हैं
- Govind kumar
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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कैसे
मंज़र
सामने
आने
लगे
हैं
गाते
गाते
लोग
चिल्लाने
लगे
हैं
Dushyant Kumar
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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जो
लोग
ख़ुद
न
करते
थे
होंठों
से
पान
साफ़
पलकों
से
कर
रहे
हैं
तेरा
पायदान
साफ़
Charagh Sharma
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उसके
अच्छे
शे'र
नहीं
भाते
हमको
जो
अच्छा
इंसान
नहीं
बन
पाता
है
Tanoj Dadhich
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कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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ज़िंदगी
अच्छे
से
जीने
का
तरीक़ा
आ
गया
जब
से
चुप
रहने
का,
सुनने
का
सलीक़ा
आ
गया
Govind kumar
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यूँँ
तो
जान
चला
जाता
हूँ
तुझ
सेे
दूर
मगर
इस
दिल
से
तेरी
बातों
का
जाल
नहीं
जाता
Govind kumar
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मैं
भला
तुझ
सेे
बिछड़कर
भी
कहाँ
जाऊँगा
साथ
आयेगी
तिरी
याद
जहाँ
जाऊँगा
बस
इसी
ख़ौफ़
से
देखा
ही
नहीं
आईना
मुझकों
मुझ
में
तू
दिखा
तो
मैं
कहाँ
जाऊँगा
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Govind kumar
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छोटी
छोटी
बातों
पे
तकरार
नहीं
करते
सच्चे
दोस्त
कभी
पीछे
से
वार
नहीं
करते
Govind kumar
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यार
आने
का
बहाना
छोड़
दे
रोज़
मुझको
तू
सताना
छोड़
दे
मैं
तिरे
अंदाज़
से
वाकिफ़
हूँ
जाँ
सो
मुझें
पागल
बनाना
छोड़
दे
तू
मुहब्बत
की
क़सम
दे
के
मुझें
बात
सब
अपनी
मनाना
छोड़
दे
कब
तलक
हम
डर
के
साए
में
जियें
तू
हमें
अब
से
डराना
छोड़
दे
और
तुझ
सेे
चाहता
मैं
कुछ
नहीं
बस
मुझें
तू
याद
आना
छोड़
दे
यूँँ
न
हो
तेरा
दीवाना
एक
दिन
हार
कर
सारा
जमाना
छोड़
दे
सोचिए
उस
घर
का
क्या
होगा
अगर
घर
का
इकलौता
कमाना
छोड़
दे
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Govind kumar
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