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Govind kumar
khwaab uske hi dikhaaye ja rahi hai zindagi
khwaab uske hi dikhaaye ja rahi hai zindagi | ख़्वाब उसके ही दिखाए जा रही है ज़िन्दगी
- Govind kumar
ख़्वाब
उसके
ही
दिखाए
जा
रही
है
ज़िन्दगी
क्यूँ
मुझे
इतना
रुलाए
जा
रही
है
ज़िन्दगी
- Govind kumar
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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बस
एक
मोड़
मिरी
ज़िंदगी
में
आया
था
फिर
इस
के
बाद
उलझती
गई
कहानी
मेरी
Abbas Tabish
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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हाल
मत
पूछो
हमारी
ज़िंदगी
का
एक
चलती-फिरती
सी
दीवार
है
बस
Rachit Sonkar
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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मेरे
ज़ख़्मों
की
भरपाई
कौन
करेगा
तू
रूठा
तो
यार
लड़ाई
कौन
करेगा
Govind kumar
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गाड़ी
अपनी
थी
पर
सामान
पराया
था
यानी
इस
चोरी
में
नुक़सान
पराया
था
Govind kumar
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ख़ुश
हैं
हम
तू
बताके
गया
ग़म
नहीं
ये,
रुलाक़े
गया
करता
था
प्यारी
बातें
बहुत
मेरा
शक़
आजमाके
गया
क्यूँ
किए
वादे
इतने
बता?
वा'दा
इक
ना
निभाके
गया
ज़िस्म
को
कैदकर
ख़ुश
नहीं?
रूह
तक
जो
दुखा
के
गया
आँख
थी
कच्चा
बर्तन
वही
दिल
जहाँ
ज़ख़्म
छुपाके
गया
ख़्वाब
में,
तेरे
हम
तू
मेरा
ख़्वाब
ये
भी
सताके
गया
मैने
जब
भी
उसे
सोचा,
वो
याद
हिचकी
में
आके
गया
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Govind kumar
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किस
किस
से
अपना
हाल
छुपाये
हम
इस
सेे
तो
अच्छा
है
मर
जाए
हम
Govind kumar
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फिर
से
इस
दिल
को
सहारा
चाहिए
तेरे
जैसा
ही
दुबारा
चाहिए
Govind kumar
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