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Govind kumar
dil ko phir dil
dil ko phir dil | दिल को फिर दिल-लगी का बहाना मिला
- Govind kumar
दिल
को
फिर
दिल-लगी
का
बहाना
मिला
आज
फिर
यार
हमको
पुराना
मिला
- Govind kumar
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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तुझे
कौन
जानता
था
मेरी
दोस्ती
से
पहले
तेरा
हुस्न
कुछ
नहीं
था
मेरी
शा'इरी
से
पहले
Kaif Bhopali
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कब
लौटा
है
बहता
पानी
बिछड़ा
साजन
रूठा
दोस्त
हम
ने
उस
को
अपना
जाना
जब
तक
हाथ
में
दामाँ
था
Ibn E Insha
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अपनी
बाँहो
से
क्यूँँ
हटाऊँ
उसे
सो
रहा
है
तो
क्यूँँ
जगाऊँ
उसे
जो
भी
मिलता
है
उसका
पूछता
है
यार
किस
किस
से
मैं
छुपाऊँ
उसे
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Kafeel Rana
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कोई
दिक़्क़त
नहीं
है
गर
तुम्हें
उलझा
सा
लगता
हूँ
मैं
पहली
मर्तबा
मिलने
में
सबको
ऐसा
लगता
हूँ
ज़रूरी
तो
नहीं
हम
साथ
हैं
तो
कोई
चक्कर
हो
वो
मेरी
दोस्त
है
और
मैं
उसे
बस
अच्छा
लगता
हूँ
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Ali Zaryoun
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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अपना
दुख
अपना
हाल
बताके
ख़ुश
हैं
ख़ुश
हैं
हम,
हमको
आप
सताके
ख़ुश
हैं
Govind kumar
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क्यूँ
बदन
ने
तिरा
ग़म
नकारा
नहीं
जानकर
भी,
तू
दिल
से
हमारा
नहीं
Govind kumar
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मैं
भला
तुझ
सेे
बिछड़कर
भी
कहाँ
जाऊँगा
साथ
आयेगी
तिरी
याद
जहाँ
जाऊँगा
बस
इसी
ख़ौफ़
से
देखा
ही
नहीं
आईना
मुझकों
मुझ
में
तू
दिखा
तो
मैं
कहाँ
जाऊँगा
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Govind kumar
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इश्क़
में
फेर-बदल
आता
है
जब
कोई
एक
बदल
जाता
है
आपकी
सारी
कहानी
सच्ची
पर
मुझें
झूठ
समझ
आता
है
रोने
लग
जाते
है
तेरे
'आशिक़
तू
तरस
फिर
भी
नहीं
खाता
है
वो
है
कैसा
न
बताओ
मुझकों
उसका
सुनके
ही
जी
घबराता
है
ये
कहानी
है
उसी
लड़के
की
आज
जो
नींद
में
चिल्लाता
है
हो
गई
हैं
वही
हालत
मेरी
जिस
में
बच
कोई
नहीं
पाता
है
आँख
कहती
हैं
कि
काजल
डालो
दिल
लहू
लेने
चला
जाता
है
ग़म
भुलाना
भी
है
इक
फ़न
लेकिन
ये
हुनर
सब
को
कहाँ
आता
है
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Govind kumar
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इस
क़दर
तुझको
ख़ुद
में
समाए
रखा
बस
तिरी
याद
से
दिल
लगाए
रखा
Govind kumar
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