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Prakamyan Gautam
laakh bhaav khaati thii
laakh bhaav khaati thii | लाख भाव खाती थी
- Prakamyan Gautam
लाख
भाव
खाती
थी
फिर
गले
लगाती
थी
बस
यही
मैं
कहता
था
जान
याद
आती
थी
- Prakamyan Gautam
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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ये
कब
कहती
हूँ
तुम
मेरे
गले
का
हार
हो
जाओ
वहीं
से
लौट
जाना
तुम
जहाँ
बेज़ार
हो
जाओ
Parveen Shakir
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ये
भी
इक
तरकीब
है
दुश्मन
से
लड़ने
की
गले
लगा
लो
जिस
पर
वार
नहीं
कर
सकते
Shariq Kaifi
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यूँँ
हर
किसी
से
भी
कोई
मिलता
है
क्या
गले
उकता
गए
हैं
अब
तेरी
आवारगी
से
हम
Amaan Pathan
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जैसे
कोई
रोता
है
गले
प्यार
से
लग
कर
कल
रात
मैं
रोया
तेरी
दीवार
से
लग
कर
Aziz Ejaaz
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ये
कब
कहा
था
मुझे
हमनवा
नहीं
देना
मगर
हाँ
फिर
से
वही
बे-वफ़ा
नहीं
देना
मैं
टूट
जाऊँ
तो
आकर
गले
लगा
लेना
कोई
दलील
कोई
मशवरा
नहीं
देना
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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न
जाने
क्यूँँ
गले
से
लगने
की
हिम्मत
नहीं
होती
न
जाने
क्यूँँ
पिता
के
सामने
बेटे
नहीं
खुलते
Kushal Dauneria
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मिल
के
होती
थी
कभी
ईद
भी
दीवाली
भी
अब
ये
हालत
है
कि
डर
डर
के
गले
मिलते
हैं
Unknown
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आओ
गले
मिल
कर
ये
देखें
अब
हम
में
कितनी
दूरी
है
Shariq Kaifi
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ये
कब
कहते
हैं
कि
आकर
हमको
गले
लगा
ले
वो
मिल
जाए
तो
रस्मन
ही
बस
हाथ
मिला
ले
काफ़ी
है
इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
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Vashu Pandey
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बदले
मौसम
में
तुम
हो
या
फिर
क्या
है
ये
इतनी
दिक़्क़त
सी
क्यूँँ
है
जीने
में
Prakamyan Gautam
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हर
छम
छम
में
मेरा
मन
है
पायल
दिल
घुँघरू
धड़कन
है
Prakamyan Gautam
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तुम
सेे
बेहतर
क्या
रब
होता
होगा?
तुम
कहती
हो
मतलब
होता
होगा
Prakamyan Gautam
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चाँद
निकल
आता
था
खिड़की
पर
मेरी
वो
जब
भी
अपनी
खिड़की
पर
आता
था
Prakamyan Gautam
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दिल
की
चोरी
का
ख़ौफ़
लगा
रहता
है
दोस्त
इन
दिल्ली
के
रहने
वालों
से
Prakamyan Gautam
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