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Muhammad Fuzail Khan
hain jitni bhi kitaaben sab
hain jitni bhi kitaaben sab | "हैं जितनी भी किताबें सब"
- Muhammad Fuzail Khan
"हैं
जितनी
भी
किताबें
सब"
हैं
जितनी
भी
किताबें
सब
मेरी
इस
ज़िन्दगानी
में
उन्हीं
सारी
किताबों
की
मेरी
हर
इक
कहानी
में
जितने
हैं
सभी
क़िस्से
बहुत
ही
ख़ास
रहते
हैं
मुझे
सब
याद
रहते
हैं
मगर
उन
सारे
क़िस्सों
में
कोई
ऐसा
भी
क़िस्सा
है
जो
मेरे
सारे
क़िस्सों
को
सदा
बेरंग
करता
है
मुझे
वो
तंग
करता
है
मुझको
तंग
करना
बस
यही
इक
भेद
है
उस
में
वरक़
के
दरमियाँ
कोई
ज़रा
सा
छेद
है
उस
में
कहानी
का
वही
हिस्सा
मैं
जब
भी
खोलता
हूँ
तो
लिखे
हैं
हर्फ़
जो
उनको
लबों
से
बोलता
हूँ
तो
बड़े
अंदाज़
से
वो
सब
इकट्ठा
हो
तो
जाते
हैं
मगर
उस
छेद
से
गिरकर
सभी
हर्फ़
खो
भी
जाते
हैं
- Muhammad Fuzail Khan
तुम
जाओ
पर
यादों
को
तो
रहने
दो
यादों
का
भी
एक
सहारा
होता
है
Sachin Shalini
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हारी
याद
के
दो
चार
सिक्के
हज़ारों
बार
दिन
में
गिन
रहा
हूँ
Umesh Maurya
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इस
रास्ते
में
जब
कोई
साया
न
पाएगा
ये
आख़िरी
दरख़्त
बहुत
याद
आएगा
Azhar Inayati
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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'अमीर'
अब
हिचकियाँ
आने
लगी
हैं
कहीं
मैं
याद
फ़रमाया
गया
हूँ
Ameer Minai
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उदास
बैठे
हैं
सारे
रस्ते
बहुत
दिनों
से
बहुत
दिनों
से
गुज़र
तुम्हारा
नहीं
हुआ
है
Muhammad Fuzail Khan
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तेरे
जाने
से
कुछ
बचा
ही
नहीं
तू
जो
होता
तो
क्या
नहीं
होता
Muhammad Fuzail Khan
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इंतिज़ार
इस
तरह
किया
हमने
ताक़
पर
रख
दिया
दिया
हमने
मसअला
है
ये
ज़िंदगी
भर
का
तुम
से
इज़हार
क्यूँ
किया
हमने
उस
की
आदत
थी
मुस्कुराने
की
जाने
क्या-क्या
समझ
लिया
हमने
अपनी
गर्दन
में
बाँधकर
ज़ंजीर
ख़ुद
ही
ख़ुद
को
जकड़
लिया
हमने
जिसने
कुछ
भी
हमें
नहीं
समझा
उस
को
सब
कुछ
समझ
लिया
हमने
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Muhammad Fuzail Khan
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अपनी
ही
हर
इक
बात
को
कहते
हैं
सही
जो
कहते
हैं
तो
कहने
दो
किसी
के
हैं
नहीं
वो
Muhammad Fuzail Khan
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उसने
तोहफ़े
में
दी
हमको
इक
अधूरी
ज़िन्दगी
हमने
जिस
पे
वार
दी
पूरी
की
पूरी
ज़िन्दगी
Muhammad Fuzail Khan
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