hain jitni bhi kitaaben sab | "हैं जितनी भी किताबें सब"

  - Muhammad Fuzail Khan
"हैंजितनीभीकिताबेंसब"
हैंजितनीभीकिताबेंसब
मेरीइसज़िन्दगानीमें
उन्हींसारीकिताबोंकी
मेरीहरइककहानीमें
जितनेहैंसभीक़िस्से
बहुतहीख़ासरहतेहैं
मुझेसबयादरहतेहैं
मगरउनसारेक़िस्सोंमें
कोईऐसाभीक़िस्साहै
जोमेरेसारेक़िस्सोंको
सदाबेरंगकरताहै
मुझेवोतंगकरताहै
मुझकोतंगकरनाबस
यहीइकभेदहैउस
में
वरक़केदरमियाँकोई
ज़रासाछेदहैउस
में
कहानीकावहीहिस्सा
मैंजबभीखोलताहूँतो
लिखेहैंहर्फ़जोउनको
लबोंसेबोलताहूँतो
बड़ेअंदाज़सेवोसब
इकट्ठाहोतोजातेहैं
मगरउसछेदसेगिरकर
सभीहर्फ़खोभीजातेहैं
  - Muhammad Fuzail Khan
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