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Firdous khan
zehan men shor-sharaabe akshar
zehan men shor-sharaabe akshar | ज़ेहन में शोर-शराबे अक्सर
- Firdous khan
ज़ेहन
में
शोर-शराबे
अक्सर
दिल
में
सन्नाटे
करते
हैं
- Firdous khan
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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आप
चाहें
तो
कहीं
और
भी
रह
सकते
हैं
दिल
हमारा
है
तो
मर्ज़ी
भी
हमारी
होगी
Shamsul Hasan ShamS
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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यूँँ
तेरी
राह
तकते
तकते
सुन
मेरी
आँखों
में
पड़
गए
जाले
अबके
बारिश
कहीं
मेरी
छत
से
तेरा
एहसास
ही
न
धो
डाले
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Firdous khan
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हँसते
हुए
वो
मुझ
सेे
जुदा
कैसे
हो
गया
नुक़सान
में
किसी
का
नफ़ा
कैसे
हो
गया
ख़ुश
क़िस्मती
पे
अपनी
मुझे
शक
सा
होता
था
इतना
हसीन
शख़्स
मेरा
कैसे
हो
गया
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Firdous khan
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चाँद
को
इस
तरह
जलाती
हूँ
तेरी
फ़ोटो
उसे
दिखाती
हूँ
मैं
तेरी
कुछ
रिकार्डिंग
सुन
कर
दाइमी
हिज्र
काट
पाती
हूँ
नींद
बिस्तर
पे
जब
नहीं
आती
मैं
तुम्हें
ओढ़ती
बिछाती
हूँ
तेरी
आँखों
को
पढ़ती
हूँ
पहले
फिर
उसे
शा'इरी
बनाती
हूँ
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Firdous khan
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लाश
बिस्तर
से
देखती
है
उसे
रूह
लटकी
हुई
है
पंखे
पर
Firdous khan
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सुनो
जानाँ
तुम्हारे
लब
पे
मय
का
एक
भी
क़तरा
मेरी
आँखों
की
है
तौहीन
और
नाकाबिल-ए-बर्दाश्त
Firdous khan
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