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Divyansh "Dard" Akbarabadi
agar aaj maine nahin roka tum ko
agar aaj maine nahin roka tum ko | अगर आज मैंने नहीं रोका तुम को
- Divyansh "Dard" Akbarabadi
अगर
आज
मैंने
नहीं
रोका
तुम
को
तो
आगे
से
तुम
और
रग़बत
करोगे
- Divyansh "Dard" Akbarabadi
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तुम
भी
शादी
करके
हमको
भूल
गई
हम
भी
नाम
कमाने
में
मसरूफ़
हुए
Tanoj Dadhich
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अब
उसकी
शादी
का
क़िस्सा
न
छेड़ो
बस
इतना
कह
दो
कैसी
लग
रही
थी
Zubair Ali Tabish
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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लब-ए-नाज़ुक
के
बोसे
लूँ
तो
मिस्सी
मुँह
बनाती
है
कफ़-ए-पा
को
अगर
चूमूँ
तो
मेहंदी
रंग
लाती
है
Aasi Ghazipuri
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इसलिए
ये
महीना
ही
शामिल
नहीं
उम्र
की
जंत्री
में
हमारी
उसने
इक
दिन
कहा
था
कि
शादी
है
इस
फरवरी
में
हमारी
Tehzeeb Hafi
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सारे
का
सारा
तो
मेरा
भी
नहीं
और
वो
शख़्स
बे-वफ़ा
भी
नहीं
ग़ौर
से
देखने
पे
बोली
है
शादी
से
पहले
सोचना
भी
नहीं
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Kushal Dauneria
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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केवल
उसका
हाथ
मेरी
बर्बादी
में
और
तो
कोई
ऐब
नहीं
शहज़ादी
में
प्यार
बहुत
करता
था
उस
सेे
मैं
लेकिन
प्यार
नहीं
देखा
जाता
है
शादी
में
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Tanoj Dadhich
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तसव्वुर
तजरबा
तेवर
तमन्ना
और
तन्हाई
मिलेंगे
फूल
सब
इस
में
ग़ज़ल
गुलदान
है
यारों
पढ़ाई
नौकरी
शादी
फिर
उसके
बाद
दो
बच्चे
हमारी
ज़िन्दगी
इतनी
कहाँ
आसान
है
यारों
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Tanoj Dadhich
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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जो
मैं
उसके
हिस्से
में
सारा
हुआ
तो
फिर
इक
बार
वो
सब
दुबारा
हुआ
तो
तिरे
ख़्वाब
तो
ऐश
ओ
आराम
के
हैं
मिरे
साथ
जो
बस
गुज़ारा
हुआ
तो
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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ख़ुद
से
दूरी
नहीं
समझते
हम
जी
हुज़ूरी
नहीं
समझते
हम
कौन
सी
बात
उसने
करनी
थी
जो
कि
पूरी
नहीं
समझते
हम
तेरे
होंठों
पे
इक
हँसी
के
सिवा
कुछ
ज़रूरी
नहीं
समझते
हम
तीसरी
सफ़
की
ख़ामुशी
को
कभी
ला-शुऊरी
नहीं
समझते
हम
एक
तस्वीर
जो
कि
आधी
है
बस
अधूरी
नहीं
समझते
हम
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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जिसे
इशारे
करना
तक
मुहाल
है
पता
है
उस
से
मेरी
बोल
चाल
है
नए
सिरे
से
सब
बता
शुरू
करें
ये
तुझ
सेे
मेरा
आख़िरी
सवाल
है
उसे
लगा
कि
हाथ
में
सिंदूर
है
मगर
मेरे
तो
हाथ
में
गुलाल
है
तेरी
तो
ख़्वाहिशें
हैं
आसमान
पर
मुझे
लगा
था
तू
भी
हम
ख़याल
है
दिमाग़
का
तो
तेज़
है
ऐ
दर्द
तू
मगर
यहाँ
तो
दिल
का
इस्तिमाल
है
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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मिलने
के
बाद
हर
कोई
मसरूफ़
हो
गया
जब
तक
नहीं
मिले
थे
सभी
बे
क़रार
थे
कोई
सुख़नवरी
थी
न
कोई
हुनर
था
पास
लेकिन
हमारे
हक़
में
तमाम
इश्तिहार
थे
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ख़ुद
अपने
हाल
पे
हँसवा
के
फिर
बेबस
किया
मुझको
किसी
पागल
ने
मुझ
को
इस
क़दर
पागल
बना
डाला
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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