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Divyansh "Dard" Akbarabadi
do chaar din ki baat men hi shaad ho ga.e
do chaar din ki baat men hi shaad ho ga.e | दो चार दिन की बात में ही शाद हो गए
- Divyansh "Dard" Akbarabadi
दो
चार
दिन
की
बात
में
ही
शाद
हो
गए
उनका
तो
सोचिए
कि
जो
बर्बाद
हो
गए
सीना
तो
चाक
करके
दिखा
दें
तुम्हें
मगर
गर
तुम
इस
इम्तिहान
में
आज़ाद
हो
गए
- Divyansh "Dard" Akbarabadi
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कू-ब-कू
फैल
गई
बात
शनासाई
की
उस
ने
ख़ुश्बू
की
तरह
मेरी
पज़ीराई
की
Parveen Shakir
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मुझे
इक
बात
कहनी
थी
अगर
मुझ
को
इज़ाज़त
हो
तुम्हीं
मेरी
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
Shadab Asghar
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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सोच
समझ
कर
देख
लिया
है
क्या
बोलूँ
तुझ
को
तो
हर
बात
बुरी
लग
जाती
है
Sohil Barelvi
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होंटों
पर
इक
बार
सजा
कर
अपने
होंट
उस
के
बाद
न
बातें
करना
सो
जाना
Ateeq Allahabadi
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छोटी
सी
बात
पे
ख़ुश
होना
मुझे
आता
था
पर
बड़ी
बात
पे
चुप
रहना
तुम्ही
से
सीखा
Zehra Nigaah
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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प्यार
मुहब्बत
बाद
की
बातें
जान
कभी
ये
सोचा
है
किसने
तेरा
साथ
दिया
था
कौन
नशे
में
ख़त्म
हुआ
Vikram Gaur Vairagi
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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बाहम
किए
इन्हें
जो
यही
ढाल
बन
गए
आई
समझ
में
टुकड़ों
की
क़ुव्वत
शिकस्ता
दिल
ये
और
बात
उस
ने
किया
क़त्ल
अहद
का
ये
और
बात
ज़िंदा
थी
निस्बत
शिकस्ता
दिल
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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जो
मैं
उसके
हिस्से
में
सारा
हुआ
तो
फिर
इक
बार
वो
सब
दुबारा
हुआ
तो
तेरे
ख़्वाब
तो
ऐश
ओ
आराम
के
हैं
मेरे
साथ
जो
बस
गुज़ारा
हुआ
तो
हम
इस
ओर
वाले
किनारे
से
वाक़िफ़
वो
उस
पार
वाला
किनारा
हुआ
तो
नफ़े
के
मआनी
तो
मैं
जानता
हूँ
मगर
जो
सफ़र
में
ख़सारा
हुआ
तो
जिसे
मैंने
समझा
था
दुश्मन
है
मुम्किन
मैं
उसकी
ही
आँखों
का
तारा
हुआ
तो
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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बेटे
के
हाथ
में
लगी
तलवार
देख
कर
माँ
डर
गई
थी
वक़्त
की
रफ़्तार
देख
कर
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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पहले
ख़याल
रख
मिरा
मेहमान
कर
मुझे
फिर
अपनी
कोई
चाल
से
हैरान
कर
मुझे
हैं
कौन
आप,
याद
नहीं,कब
मिले
थे
हम
इतना
भी
ख़ुश
न
होइए
पहचान
कर
मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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मिलने
के
बाद
हर
कोई
मसरूफ़
हो
गया
जब
तक
नहीं
मिले
थे
सभी
बे
क़रार
थे
कोई
सुख़नवरी
थी
न
कोई
हुनर
था
पास
लेकिन
हमारे
हक़
में
तमाम
इश्तिहार
थे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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