bazm-e-furqat sajaaye baithe hain | बज़्म-ए-फ़ुर्क़त सजाए बैठे हैं

  - Yash Sharma
बज़्म-ए-फ़ुर्क़तसजाएबैठेहैं
तेरेक़िस्सेसुनाएबैठेहैं
दिलकीमहफ़िलसजाएबैठेहैं
जिस
में'आशिक़पराएबैठेहैं
हमकोछोड़ोकिहमतोपागलहैं
आपकिसकेसताएबैठेहैं
शोरबरपाहैग़लतीमेरीहै
आपक्यूँँमुँहफुलाएबैठेहैं
'यश'बिखरनेदेनाघरकोतुम
लोगआशाजगाएबैठेहैं
  - Yash Sharma
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