kya pata hai zindagi hoti hai kaisi gham men ik ke | क्या पता है ज़िंदगी होती है कैसी ग़म में इक के

  - "Dharam" Barot
क्यापताहैज़िंदगीहोतीहैकैसीग़ममेंइकके
आपनेक्याज़िंदगीजीहैकभीभीग़ममेंइकके
कहताथावोलौटकरआतेनहींजातेहैंजोलोग
फिरउसीनेफूँकदीसिगरेटकितनीग़ममेंइकके
इश्क़मेंबर्बादबच्चेनेकियाशिद्दतसेख़ुदको
माँकमाकरलारहीदोवक़्तरोटीग़ममेंइकके
खेलखेलाथाजुएनेहोगयाबर्बादघरये
इससेेअच्छाथायेबनजाताशराबीग़ममेंइकके
बे-वफ़ाहूँऔरपक्काबे-वफ़ाइससचकोमाना
बादइसकेज़िंदगीमेरीभीगुज़रीग़ममेंइकके
  - "Dharam" Barot
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