kuchh log hi pardes ka tab sochte | कुछ लोग ही परदेस का तब सोचते

  - "Dharam" Barot
कुछलोगहीपरदेसकातबसोचते
हरघरसेसबइसबातकोअबसोचते
मानेंइसेहीअच्छेदिनक्याहमसभी
आरामसेइसबातकोकबसोचते
महँगाईसेक्यालेनादेनालोगोंका
सबधर्मकेबसनामपरजबसोचते
घरचलरहाहैवोभीजैसेतैसेबस
हमसाथमिलकरकाशयेसबसोचते
हरकाममेरानामसेहोजाताहै
ऐसेमेरेबारेमेरेरबसोचते
  - "Dharam" Barot
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