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"Dharam" Barot
koi mujhe kya chhod paayega kabhi
koi mujhe kya chhod paayega kabhi | कोई मुझे क्या छोड़ पाएगा कभी
- "Dharam" Barot
कोई
मुझे
क्या
छोड़
पाएगा
कभी
तन्हा
को
कोई
तोड़
पाएगा
कभी
सारी
नसीहत
दूसरों
के
वास्ते
ख़ुद
को
भी
तू
झिंझोड़
पाएगा
कभी
नख़रे
तेरे
मैं
जानता
हूँ
अच्छे
से
बोलें
हाँ
फिर
मुँह
मोड़
पाएगा
कभी
वो
सब
सियासत
में
बनेगा
पॉसिबल
इंपॉसिबल
गठजोड़
पाएगा
कभी
दिल
से
उतर
कर
पास
कैसे
थी
धरम
ये
झूठ
थोड़ी
छोड़
पाएगा
कभी
- "Dharam" Barot
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हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामुशी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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देखिए
होगा
श्री-कृष्ण
का
दर्शन
क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग
में
दिल
गोपियों
का
है
बेकल
Mohsin Kakorvi
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इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
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हम
तो
कुछ
देर
हँस
भी
लेते
हैं
दिल
हमेशा
उदास
रहता
है
Bashir Badr
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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तुम्हें
इक
मश्वरा
दूँ
सादगी
से
कह
दो
दिल
की
बात
बहुत
तैयारियाँ
करने
में
गाड़ी
छूट
जाती
है
Zubair Ali Tabish
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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जाने
वाले
इश्क़
समझा
जाते
हैं
पास
थोड़ी
साथ
रहता
है
ख़ुदा
"Dharam" Barot
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दिया
है
घाव
पर
अच्छा
लगा
था
लिया
था
मान
तो
बोसा
लगा
था
बहानेबाज़
करता
था
बहाने
था
झूठा
पर
मुझे
सच्चा
लगा
था
न
जाने
खेल
क्या
क्या
जानती
थी
खिलाड़ी
भी
उसे
कच्चा
लगा
था
चला
था
छोड़
कर
मँझधार
पर
साथ
सिखाया
तैरना
ऐसा
लगा
था
बुराई
सामने
कर
दी
थी
मैंने
बताए
आपको
कैसा
लगा
था
उड़े
थे
होश
आईना
भी
तोड़ा
धरम
ख़ुद
को
बुरा
इतना
लगा
था
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"Dharam" Barot
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रूह
तो
बस
बात
करती
है
तुम्हारी
बात
करते
हो
ख़ुदा
की
मर्ज़ी
की
क्यूँ
"Dharam" Barot
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मुसलसल
मुकम्मल
सहारा
कहाँ
है
हमारा
था
पर
अब
हमारा
कहाँ
है
क़रीबी
नहीं
इश्क़
ये
बात
कह
के
गया
दूर
वो
भी
हमारा
कहाँ
है
निकल
आए
है
हम
बहुत
दूर
तक
दोस्त
ये
मत
पूछ
इसका
किनारा
कहाँ
है
नहीं
हो
रहा
ये
बहुत
अच्छा
है
दोस्त
हो
गर
इश्क़
मौक़ा
दुबारा
कहाँ
है
चुनौती
को
पहले
'धरम'
झेल
लेते
शुरू
के
सफ़र
में
सहारा
कहाँ
है
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"Dharam" Barot
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तुम
सब
सेे
अच्छे
हो
तो
मेरे
बारे
थोड़ा
सोच
लो
मुश्किल
है
तो
ज़्यादा
नहीं
धीरे
से
थोड़ा
सोच
लो
ये
ज़ाविया
भी
खोल
दो
हो
ख़ानदानी
जो
रईस
भूखे
को
अपना
खाना
दे
पाओगे
थोड़ा
सोच
लो
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"Dharam" Barot
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