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DEVANSH TIWARI
ghamon ko aas-paas rakhna hai
ghamon ko aas-paas rakhna hai | ग़मों को आस-पास रखना है
- DEVANSH TIWARI
ग़मों
को
आस-पास
रखना
है
हँसी
को
इस
तरह
परखना
है
ख़ुशी
में
जौन
की
ग़ज़ल
गाकर
हमें
ख़ुद
को
उदास
रखना
है
- DEVANSH TIWARI
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किस
की
होली
जश्न-ए-नौ-रोज़ी
है
आज
सुर्ख़
मय
से
साक़िया
दस्तार
रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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है
ख़ुशी
इंतिज़ार
की
हर
दम
मैं
ये
क्यूँँ
पूछूँ
कब
मिलेंगे
आप
Nizam Rampuri
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देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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गुमान
है
या
किसी
विश्वास
में
है
सभी
अच्छे
दिनों
की
आस
में
है
ये
कैसा
जश्न
है
घर
वापसी
का
अभी
तो
राम
ही
वनवास
में
है
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Azhar Iqbal
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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मुझको
ऐसे
देख
रहा
हैरानी
में
जैसे
सूरज
देख
लिया
पेशानी
में
मैं
भी
उसको
देख
रहा
हूँ
कुछ
ऐसे
जैसे
सूरज
डूब
रहा
हो
पानी
में
मुश्किल
में
मुस्कान
रखी
उन
होंठों
पर
कितना
मुश्किल
काम
किया
आसानी
में
वहशीपन
है
इस
दुनिया
की
नीयत
में
बच्चा-बच्चा
चीख
रहा
वीरानी
में
उस
दिन
पहली
बार
उदासी
टकराई
जब
इक
पौधा
टूट
गया
शैतानी
में
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DEVANSH TIWARI
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कभी
तो
निकलो
ग़ज़ल
से
बाहर
नहीं
सताओ
क़दम
बढ़ाओ
तुम्हारी
जानिब
ही
आ
रहे
हैं
नज़र
उठाओ
क़दम
बढ़ाओ
DEVANSH TIWARI
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सबको
इश्क़
सिखाने
वाली
लड़की
सुन
पहले
इश्क़
निभाना
पड़ता
है
लड़की
DEVANSH TIWARI
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मुझको
ऐसे
देख
रहा
हैरानी
में
जैसे
सूरज
देख
लिया
पेशानी
में
मैं
भी
उसको
देख
रहा
हूँ
कुछ
ऐसे
जैसे
सूरज
डूब
रहा
हो
पानी
में
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DEVANSH TIWARI
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इश्क़
में
हद
से
बढ़
सकती
है,बेहतर
है
सीप
में
मोती
गढ़
सकती
है,बेहतर
है
ख़ामोशी
भी
सुन
सकती
है
वो
लड़की
मतलब
आँखें
पढ़
सकती
है,बेहतर
है
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DEVANSH TIWARI
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