jab bhi hothon pe aah aayi hai | जब भी होंठों पे आह आई है

  - Dharamraj deshraj
जबभीहोंठोंपेआहआईहै
तबहीमैंनेक़लमउठाईहै
मैंनयाइंक़िलाबलाऊँगा
मेरेहाथोंमेंरोशनाईहै
अबतोदुश्मनअज़ीज़लगतेहैं
दोस्तीहमनेआज़माईहै
अपनेज़ख़्मोंसेप्यारकरताहूँ
ज़िन्दगीभरकीयेकमाईहै
दर्दो-ग़म,अश्क़,आह,फ़रियादें
मेरीइनसबसेेआशनाईहै
वोनिग़ाहोंसेक़त्लकरदेंगें
सरझुकानेमेंहीभलाईहै
ख़्वाबख़ुशियोंकाक्या'धरम'देखा
ज़िस्ममेंरूहकसमसाईहै
  - Dharamraj deshraj
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