door kyun karte ho mujh ko dil ke apne dhyaan se | दूर क्यूँँ करते हो मुझ को दिल के अपने ध्यान से

  - Deep kamal panecha
दूरक्यूँँकरतेहोमुझकोदिलकेअपनेध्यानसे
मैंतुम्हाराहूँमुक़म्मलजिस्म-ओ-ज़ेहन-ओ-जानसे
साथचलनाहैतोराह-ए-कामयाबीपेचलो
ज़िन्दगीरौशनमैंकरदूँगातिरीमुस्कानसे
माँभवानीकीक़समखाताहूँमेराकरयक़ीन
सरउठाकेतूचलेगीसाथमेरेशानसे
कहनेपेतेरेरुकाहूँ,ज़िक्र-ए-लम्स-ए-ग़ैरपर
फिरकहागररूहउसकीनोंचलूँगाजानसे
तेरेआनेकीकहींउम्मीदशायदबाक़ीहै
अबउठालेजाओमुझकोइश्क़केशमशानसे
मौतजैसेगुज़रेहैनाराज़गीसेउससेदिन
परख़बरउसकोहोनेपाएकानों-कानसे
बे-क़रारीमेंसँभालाकैसेमैंनेख़ुदकोहै
बे-क़रारीमेंसँभालाख़ुदकोकरहलकानसे
तूसमझतीहैयेदुनियावैसीतोबिल्कुलनहीं
कैसेदिलतुझकोलगानेदूँकिसीअंजानसे
इतनेज़ख़्मोंकोलिएअबतोनहींजीसकतामैं
ज़ेहनकबकामरगयाअबमरनाचाहूँजानसे
क्यूँँथोड़ासाथचलकेदेखलोतुम"दीप"के
लोगसबजानेंगेतुमको"दीप"कीपहचानसे
  - Deep kamal panecha
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