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Chetan
gaav men laut ke nahin jaata
gaav men laut ke nahin jaata | गाँव में लौट के नहीं जाता
- Chetan
गाँव
में
लौट
के
नहीं
जाता
बेटा
अब
बाप
पे
नहीं
जाता
उसका
अब
कुछ
नहीं
है
कमरे
में
फिर
भी
वो
कमरे
से
नहीं
जाता
इस
गली
कोई
कम
ही
आता
है
और
कुछ
बिन
लिए
नहीं
जाता
ज़िंदगी
में
न
वो
कभी
आए
बाद
जो
जाने
के
नहीं
जाता
- Chetan
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ये
कौन
आने
जाने
लगा
उस
गली
में
अब
ये
कौन
मेरी
दास्ताँ
दोहराने
वाला
है
Jamal Ehsani
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ये
सर्द
रात
ये
आवारगी
ये
नींद
का
बोझ
हम
अपने
शहर
में
होते
तो
घर
चले
जाते
Ummeed Fazli
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मुझ
को
कहानियाँ
न
सुना
शहर
को
बचा
बातों
से
मेरा
दिल
न
लुभा
शहर
को
बचा
Taimur Hasan
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'अल्वी'
ये
मो'जिज़ा
है
दिसम्बर
की
धूप
का
सारे
मकान
शहर
के
धोए
हुए
से
हैं
Mohammad Alvi
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तुम्हें
मैं
क्या
बताऊँ
इस
शहर
का
हाल
कैसा
है
यहाँ
बारिश
तो
होती
है
मगर
सावन
नहीं
आता
Bhaskar Shukla
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जो
सुनते
हैं
कि
तिरे
शहर
में
दसहरा
है
हम
अपने
घर
में
दिवाली
सजाने
लगते
हैं
Jamuna Parsad Rahi
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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लकीरें
खींच
के
मिट्टी
पे
बैठ
जाता
हूँ
यहाँ
मकाँ
था,
ये
बाज़ार,
ये
गली
उस
की
Ashraf Yousafi
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सुना
है
लोग
उसे
आँख
भर
के
देखते
हैं
सो
उस
के
शहर
में
कुछ
दिन
ठहर
के
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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पहली
गोली
चलाने
वाले
बोल
आख़िरी
घाव
किसका
भरता
है
Chetan
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जाने
क्यूँ
हम
निभा
नहीं
पाए
साथ
हैं
देखो
कैसे
कैसे
लोग
Chetan
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जिसको
हर
दिन
मनाना
पड़ता
है
उसको
इक
दिन
गँवाना
पड़ता
है
वक़्त
को
बेटे
जैसे
पाला
है
सबको
अच्छा
बताना
पड़ता
है
उसकी
मर्ज़ी
वो
जब
चला
जाए
ख़ुद
को
वापस
बुलाना
पड़ता
है
इतना
नाकाम
हो
गया
हूँ
मैं
हर
घड़ी
काम
आना
पड़ता
है
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Chetan
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हार
के
गिर
पड़े
जो
बिस्तर
पे
तुम
यक़ीं
मानों
उठ
खड़े
होंगे
Chetan
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उसने
वा'दा
किया
था
आने
का
था
मगर
वो
भी
इस
ज़माने
का
शुक्र
है
घर
कोई
नहीं
आया
जब
ठिकाना
नहीं
था
खाने
का
क्यूँँ
ख़ुशी
हो
अगर
मिलें
अब
हम
ज़ख़्म
गहरा
है
दूर
जाने
का
क्या
तुझे
चाहता
है
अब
कोई
या
पता
मिल
गया
ख़ज़ाने
का
अब
मुक़ाबिल
नहीं
हैं
हम
दोनों
ये
है
पल
राब्ता
निभाने
का
वो
सहारा
नहीं
रहा
मेरा
सो
बहाना
है
डगमगाने
का
तेज़
बारिश
में
बाम-ओ-दर
को
क्यूँँ
हक़
नहीं
होता
थरथराने
का
मुझको
रातें
जगा
रही
हैं
तो
दिन
को
क्यूँँ
हक़
नहीं
सुलाने
का
नाम
पर
उसके
ये
कहानी
थी
इंतिहा
क्या
लिखें
फ़साने
का
देता
दस्तक
तो
खुल
गया
होता
घर
उसी
से
था
आस्ताने
का
इक
वजह
था
वो
गुनगुनाने
की
इक
बहाना
था
मुस्कुराने
का
आ
गया
हूँ
उड़ान
भरने
मैं
हौसला
मुझ
में
लड़खड़ाने
का
कैसे
कोई
करे
रिहा
उसको
जो
सिपाही
हो
क़ैद
ख़ाने
का
हर
घड़ी
नाम
साथ
'गर
रहता
होता
कोठा
भी
घर
घराने
का
कौन
हसरत
तेरी
करे
चेतन
शौक़
सब
कुछ
तुझे
गँवाने
का
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