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Bhoomi Srivastava
ye aazaa
ye aazaa | ये आज़ादी का कैसा जश्न है भारत
- Bhoomi Srivastava
ये
आज़ादी
का
कैसा
जश्न
है
भारत
जहाँ
बच्चे
तिरे
भूखे
सो
जाते
हैं
- Bhoomi Srivastava
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मुझको
भी
ज़िद
करने
का
हक़
दो
साहब
मेरे
भीतर
भी
इक
बच्चा
रहता
है
Atul K Rai
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न
खाओ
क़स
में
वग़ैरा
न
अश्क
ज़ाया'
करो
तुम्हें
पता
है
मेरी
जान
हक़-पज़ीर
हूँ
मैं
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Amaan Haider
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कुछ
रिश्तों
में
दिल
को
आज़ादी
नइँ
होती
कुछ
कमरों
में
रौशनदान
नहीं
होता
है
Vikram Gaur Vairagi
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यूँँ
ही
थोड़ी
मेरी
गज़लों
में
इतना
दुख
होता
है
इस
दुनिया
ने
हम
लड़कों
से
रोने
का
हक़
छीना
है
Harsh saxena
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तो
डर
रहे
हैं
आप
कहीं
हक़
न
माँग
ले
यानी
कि
सबको
खौफ़
है
औरत
के
नाम
से
Abhishar Geeta Shukla
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उस
मुल्क
की
सरहद
को
कोई
छू
नहीं
सकता
जिस
मुल्क
की
सरहद
की
निगहबान
हैं
आँखें
Unknown
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कोई
तो
सूद
चुकाए
कोई
तो
ज़िम्मा
ले
उस
इंक़लाब
का
जो
आज
तक
उधार
सा
है
Kaifi Azmi
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मोहब्बत
की
तो
कोई
हद,
कोई
सरहद
नहीं
होती
हमारे
दरमियाँ
ये
फ़ासले,
कैसे
निकल
आए
Khalid Moin
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तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
Harsh saxena
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शब
के
सन्नाटे
में
ये
किस
का
लहू
गाता
है
सरहद-ए-दर्द
से
ये
किस
की
सदा
आती
है
Ali Sardar Jafri
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ख़्वाबों
में
जब
भी
आते
हो
मेरे
बन
कर
रह
जाते
हो
काले
कुर्ते
में
देखा
था
तब
से
तुम
बेहद
भाते
हो
मैं
ख़ुश
हो
जाती
हूँ
उस
दिन
जिस
दिन
तुम
मिलने
आते
हो
तुम
मेरी
माँ
को
अपनी
माँ
कहने
से
क्यूँ
शरमाते
हो
जोश
में
आकर
उफ़
तुम
भी
ना
यार
से
भाभी
बुलवाते
हो
रिश्ता
पक्का
करने
को
घर
मैं
आऊँ
या
तुम
आते
हो
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Bhoomi Srivastava
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फीस
ट्यूशन
की
बेकार
सब
हो
गई
अस्ल
उस्ताद
तो
ज़िंदगी
निकली
है
Bhoomi Srivastava
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बेकार
है
उस
से
अलग
करना
मुझे
वो
मुझ
में
मेरे
अंत
तक
मौजूद
है
Bhoomi Srivastava
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उस
रोज़
तुम
थे
ही
कहाँ
जिस
रोज़
मैं
बेहोश
थी
मैं
याद
भी
तब
आ
रही
जब
वक़्त
ने
तुमको
डसा
Bhoomi Srivastava
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मैं
नफ़रत
उस
से
कैसे
कर
लूँ
जिस
ने
मुझे
काँटे
हटाकर
गुल
दिए
हैं
Bhoomi Srivastava
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