jab kabhi main zindagi ka vaqt pichla dekhti hooñ | जब कभी मैं ज़िंदगी का वक़्त पिछला देखती हूँ

  - Bhoomi Srivastava
जबकभीमैंज़िंदगीकावक़्तपिछलादेखतीहूँ
मुझकोअक्सरमैंकिताबोंमेंहीउलझादेखतीहूँ
जिनपलोंमेंमेरीमाँकोमेरेपापापीटतेथे
उनपलोंमेंमैंकिनारेख़ुदकोरोतादेखतीहूँ
आरज़ूहैयेकोईजानपाएदर्दमेरे
इसलिएभीमैंहजारोंबारशीशादेखतीहूँ
एकनंबरसेसफलताजबमेरीरुकतीकभीहै
मौतसेपहलेकामंज़रतबमैंतन्हादेखतीहूँ
बे-मुरव्वतबे-हक़ीक़तजिसकोलगतीमेरीआँखें
उसकाचेहराफिरमैंचश्मेंमेंभीधुँधलादेखतीहूँ
  - Bhoomi Srivastava
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