hai khabar mujh ko muqammal jaanta koi nahin | है ख़बर मुझ को मुक़म्मल जानता कोई नहीं

  - Bhoomi Srivastava
हैख़बरमुझकोमुक़म्मलजानताकोईनहीं
इसलिएमेरामुसलसलराब्ताकोईनहीं
गाँवहूँजैसेकोईमैंजिसमेंरहतेसबमगर
देरतकबसनावफ़ासेचाहताकोईनहीं
दुखयेमुझकोखारहाहैजानेक्याहैमुझमेंजो
मैंअगरबोलूँनहींतोबोलताकोईनहीं
ख़ुद-कुशीकरनाअगरचाहूँतोमुश्किलहैबड़ी
मुझकोमेरीहरकतोंपरटोकताकोईनहीं
देखतीहूँसबकोइतनीआससेमैंहरदफ़ा
हालतोसुनतेहैंसबपरपूछताकोईनहीं
मसअलामेरायहीतोहैकिमुझकोचाहिए
प्यारअपनोंकाफ़क़तयेमानताकोईनहीं
'भूमि'ज़्यादाध्यानमतदोइनसभीबातोंपेतुम
ख़ुदहीपोछोअपनेआँसूपोछताकोईनहीं
  - Bhoomi Srivastava
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy