पल-भरतेरेक़रीबहूँपल-भरनहींहूँमैं
होनाजोचाहताहूँवोअक्सरनहींहूँमैं
क्यावस्फ़हैकिजैसेख़ुदाहरजगहहैतू
क्याज़ुल्महैकिअपनेहीअंदरनहींहूँमैं
पढ़नाकईदफ़ापड़ेमुबहमवोशे'रहूँ
खुलजाएहरकिसीपेजोयकसरनहींहूँमैं
साथउनकेमुझकोदेखकेउनकीतरहनजान
लश्करमेंहूँपहिस्सा–ए–लश्करनहींहूँमैं
मुझकोबिखेरनेमेंमशक़्क़तनकरकिऐ
मौज-ए-नसीमबू-ए-गुल-ए-तरनहींहूँमैं
तौर-ओ-तरीक़-ए-हुस्नकामुझकोनहींहैइल्म
रस्म-ओ-रिवाज-ए-'इश्क़सेख़ूगरनहींहूँमैं
मेरीतोहरनफ़सपेनविश्ताहैउसकानाम
ख़्वाब-ओ-ख़याल–ए-यारमेंक्यूँँकरनहींहूँमैं
किसज़ब्त-ए-दिलसेउससेयेकहनापड़ा‘अभी’
जान-ए-'अज़ीज़तेरामुक़द्दरनहींहूँमैं