pal-bhar tere qareeb hooñ pal-bhar nahin hooñ main | पल-भर तेरे क़रीब हूँ पल-भर नहीं हूँ मैं

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'
पल-भरतेरेक़रीबहूँपल-भरनहींहूँमैं
होनाजोचाहताहूँवोअक्सरनहींहूँमैं
क्यावस्फ़हैकिजैसेख़ुदाहरजगहहैतू
क्याज़ुल्महैकिअपनेहीअंदरनहींहूँमैं
पढ़नाकईदफ़ापड़ेमुबहमवोशे'रहूँ
खुलजाएहरकिसीपेजोयकसरनहींहूँमैं
साथउनकेमुझकोदेखकेउनकीतरहजान
लश्करमेंहूँहिस्सा–ए–लश्करनहींहूँमैं
मुझकोबिखेरनेमेंमशक़्क़तकरकि
मौज-ए-नसीमबू-ए-गुल-ए-तरनहींहूँमैं
तौर-ओ-तरीक़-ए-हुस्नकामुझकोनहींहैइल्म
रस्म-ओ-रिवाज-ए-'इश्क़सेख़ूगरनहींहूँमैं
मेरीतोहरनफ़सपेनविश्ताहैउसकानाम
ख़्वाब-ओ-ख़याल–ए-यारमेंक्यूँँकरनहींहूँमैं
किसज़ब्त-ए-दिलसेउससेयेकहनापड़ा‘अभी’
जान-ए-'अज़ीज़तेरामुक़द्दरनहींहूँमैं
  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy