sochte rahe shab-bhar bas usii ke baare men | सोचते रहे शब–भर बस उसी के बारे में

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'
सोचतेरहेशब–भरबसउसीकेबारेमें
हारहरख़ुशीबैठेहमथेजिसख़सारेमें
रातदिनमशक़्क़तकरजोबनाईथीकश्ती
वोपलटगईउसकेएकहीइशारेमें
हाथथामनेवालाकोईभीनहींहैऔर
हमरुकेवहींपरहैंजानेकिससहारेमें
क्याकरेंगेहमआख़िरइसनसीबकाजबहो
तुमनहींहमारेमें,हमनहींतुम्हारेमें
रौशनीहै?हसरतहै?याकिसीकीआँखेंहैं?
क्याभलाचमकताहैरातउससितारेमें?
देखना‘अभी’येहैकितनेदिनजियेंगेहम
पेटभीहैख़ालीऔरकुछनहींपिटारेमें
  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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