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Ashutosh Kumar "Baagi"
khizr ki umr bhi ata kar dii
khizr ki umr bhi ata kar dii | ख़िज़्र की उम्र भी अता कर दी
- Ashutosh Kumar "Baagi"
ख़िज़्र
की
उम्र
भी
अता
कर
दी
फिर
तेरा
हिज्र
भी
दिया
साहब
- Ashutosh Kumar "Baagi"
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उसने
हम
सेे
बातें
करना
छोड़
दिया
माँ
की
जिस
सेे
बात
कराने
वाले
थे
Tanoj Dadhich
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मैंने
आँखों
के
किनारे
भी
न
तर
होने
दिए
जिस
तरफ़
से
आया
था
सैलाब
वापस
कर
दिया
Abbas Tabish
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ख़ुदा
ने
फ़न
दिया
हमको
कि
लड़के
इश्क़
लिखेंगे
ख़ुदा
कब
जानता
था
हम,
ग़ज़ल
में
दर्द
भर
देंगे
Prashant Sharma Daraz
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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मेहनत
तो
करता
हूँ
फिर
भी
घर
ख़ाली
है
बाबूजी
मिट्टी
के
कुछ
दीपक
ले
लो
दीवाली
है
बाबूजी
मिट्टी
बेच
रहा
हूँ
जिस
में
कोई
जाल
फ़रेब
नहीं
सोना
चाँदी
दूध
मिठाई
सब
जा'ली
है
बाबूजी
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Gyan Prakash Akul
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गुज़रने
ही
न
दी
वो
रात
मैं
ने
घड़ी
पर
रख
दिया
था
हाथ
मैं
ने
Shahzad Ahmad
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कहाँ
चराग़
जलाएँ
कहाँ
गुलाब
रखें
छतें
तो
मिलती
हैं
लेकिन
मकाँ
नहीं
मिलता
Nida Fazli
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मक़तल-ए-शौक़
के
आदाब
निराले
हैं
बहुत
दिल
भी
क़ातिल
को
दिया
करते
हैं
सर
से
पहले
Ali Sardar Jafri
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मुझे
अँधेरे
से
बात
करनी
है
सो
करा
दो,
दिया
बुझा
दो
कुछ
एक
लम्हों
को
रौशनी
का
गला
दबा
दो,
दिया
बुझा
दो
रिवाज़-ए-महफ़िल
निभा
रहा
हूँ
बता
रहा
हूँ
मैं
जा
रहा
हूँ
मुझे
विदा
दो,
जो
रोना
चाहे
उन्हें
बुला
दो,
दिया
बुझा
दो
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Vikram Gaur Vairagi
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ये
सब
ख़ुशियाँ
किसी
की
माँग
में
सिंदूर
सी
हैं
और
मैं
वो
लड़की,
लड़कपन
में
ही
बेवा
हो
गई
है
जो
Ashutosh Kumar "Baagi"
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तेरी
ही
ज़िद
करता
हूँ
इश्क़
में
थोड़ा
कच्चा
हूँ
छोड़
दिया
अच्छा
कह
कर
मोती
हूँ
पर
ज़ाया'
हूँ
वो
तो
सदा
देता
होगा
मैं
ही
शायद
बहरा
हूँ
जान
नहीं
दूँगा
अपनी
मैं
बस
यूँँ
ही
कहता
हूँ
क्यूँँ
मैं
टूटा
हूँ
इतना
क्या
मैं
कोई
वा'दा
हूँ
मुझको
क्यूँँ
चुप
करते
हो
तेरा
ही
तो
तोता
हूँ
दो
दिन
की
ख़ातिरदारी
क़ुर्बानी
का
बकरा
हूँ
दिल
में
मुझको
तू
रख
ले
जैसे
कोई
शिकवा
हूँ
यार
मुझे
तू
फुसला
ले
सीधा
सादा
बच्चा
हूँ
दर्द
मेरा
क्या
समझोगे
ख़िज़्र
हूँ
मैं
औ
भटका
हूँ
कान्हा
हो
तुम
लेकिन
मैं
राधा
हूँ
या
मीरा
हूँ
कल
मैं
ग़ज़लें
काटूँगा
आज
मैं
आँसू
बोता
हूँ
मेरा
जाने
क्या
होगा
पानी
हूँ
औ
ठहरा
हूँ
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Ashutosh Kumar "Baagi"
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किसकी
बारी
है
अब
मियाँ
मुझ
में
कौन
लेता
है
हिचकियाँ
मुझ
में
काश
मंज़िल
कोई
मुझे
कहता
सबको
दिखती
हैं
सीढ़ियाँ
मुझ
में
रोज़
किरदार
एक
मरता
है
टूटी
रहती
हैं
चूड़ियाँ
मुझ
में
क़ब्र
हूँ
और
चलती
फिरती
हूँ
दफ़्न
कितनी
हैं
सिसकियाँ
मुझ
में
क़ुर्बतों
का
सिला
मिला
ऐसा
रह
गईं
हैं
तो
दूरियाँ
मुझ
में
मैं
तो
कमज़र्फ़
एक
सहरा
हूँ
ढूँढ़ती
है
वो
सीपियाँ
मुझ
में
गर्मियों
में
मुझे
वो
छोड़
गया
जिसने
काटी
थीं
सर्दियाँ
मुझ
में
इश्क़
के
फूल
जो
खिले
मुझ
में
छोड़
दी
हिज्र
बकरियाँ
मुझ
में
तुग़लक़ी
हुक्म
उसके
आते
हैं
फिर
उजड़ती
हैं
दिल्लियाँ
मुझ
में
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Ashutosh Kumar "Baagi"
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उस
ने
अपने
बाल
काटे
हाए
रे
कुछ
यूँँ
लगा
ज़िन्दगी
से
कोई
मेरी,
साल
जैसे
काट
दे
Ashutosh Kumar "Baagi"
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दर्द
में
आ
रहा
मज़ा
साहब
तुमने
ऐसा
है
क्या
किया
साहब
ख़िज़्र
की
उम्र
भी
अता
कर
दी
फिर
तेरा
हिज्र
भी
दिया
साहब
अब
नहीं
बोलते
मेरे
हक़
में
बन
गए
तुम
भी
अब
ख़ुदा
साहब
हाथ
छूटे
नहीं
कभी
अपने
उम्र
भर
हम
रहे
जुदा
साहब
मुझको
छोड़ा
मेरी
ख़ुशी
के
लिए
ग़म
इसी
बात
का
रहा
साहब
मुझको
अब
आप
बस
दु'आ
दीजे
काम
आई
न
कुछ
दवा
साहब
उसकी
ग़लती
थी
इश्क़
कर
बैठा
वरना
था
आदमी
भला
साहब
ख़ुशनसीबी
है
तुम
सेे
इश्क़
हुआ
और
ये
ही
मेरी
सज़ा
साहब
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Ashutosh Kumar "Baagi"
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