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Ashutosh Kumar "Baagi"
kahii lagta nahin hai dil ki ghar ho ya ho veeraana
kahii lagta nahin hai dil ki ghar ho ya ho veeraana | कहीं लगता नहीं है दिल कि घर हो या हो वीराना
- Ashutosh Kumar "Baagi"
कहीं
लगता
नहीं
है
दिल
कि
घर
हो
या
हो
वीराना
हमारे
सर
पे
ना
जाने
जो
है,
आज़ार
किसका
है?
- Ashutosh Kumar "Baagi"
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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तो
क्या
ये
हो
नहीं
सकता
कि
तुझ
से
दूर
हो
जाऊँँ
मैं
तुझ
को
भूलने
के
वासते
मजबूर
हो
जाऊँ
सुना
है
टूटने
पर
दिल
सभी
कुछ
कर
गुजरते
हैं
मुझे
भी
तोड़
दो
इतना
कि
मैं
मशहूर
हो
जाऊँ
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SHIV SAFAR
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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है
बहुत
लंबी
ज़िन्दगी
मेरी
हाँ,
मेरे
कान
तक
तो
आती
है
Ashutosh Kumar "Baagi"
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भेज
रहे
हो
मुझ
को
ख़ुदस
दूर
मगर
ये
तो
सुन
लो
पाँव
नहीं
दुखते
हैं
जानाँ
दिल
दुखते
हैं
हिजरत
में
Ashutosh Kumar "Baagi"
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किसकी
बारी
है
अब
मियाँ
मुझ
में
कौन
लेता
है
हिचकियाँ
मुझ
में
काश
मंज़िल
कोई
मुझे
कहता
सबको
दिखती
हैं
सीढ़ियाँ
मुझ
में
रोज़
किरदार
एक
मरता
है
टूटी
रहती
हैं
चूड़ियाँ
मुझ
में
क़ब्र
हूँ
और
चलती
फिरती
हूँ
दफ़्न
कितनी
हैं
सिसकियाँ
मुझ
में
क़ुर्बतों
का
सिला
मिला
ऐसा
रह
गईं
हैं
तो
दूरियाँ
मुझ
में
मैं
तो
कमज़र्फ़
एक
सहरा
हूँ
ढूँढ़ती
है
वो
सीपियाँ
मुझ
में
गर्मियों
में
मुझे
वो
छोड़
गया
जिसने
काटी
थीं
सर्दियाँ
मुझ
में
इश्क़
के
फूल
जो
खिले
मुझ
में
छोड़
दी
हिज्र
बकरियाँ
मुझ
में
तुग़लक़ी
हुक्म
उसके
आते
हैं
फिर
उजड़ती
हैं
दिल्लियाँ
मुझ
में
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Ashutosh Kumar "Baagi"
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जफ़ा
जो
कर
सके
बदले
वफ़ा
के
मोहब्बत
उसके
दर
सज्दा
करेगी
Ashutosh Kumar "Baagi"
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जुगनुओं
तुम
ही
मुझको
बतलाओ
रात
कपड़े
कहाँ
बदलती
है
Ashutosh Kumar "Baagi"
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