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Ayush Aavart
pyaar mujhi se karti thii vo ye main aaKHir tab samjha
pyaar mujhi se karti thii vo ye main aaKHir tab samjha | प्यार मुझी से करती थी वो ये मैं आख़िर तब समझा
- Ayush Aavart
प्यार
मुझी
से
करती
थी
वो
ये
मैं
आख़िर
तब
समझा
उसने
जब
मुझ
सेे
कह
डाला
तुमने
मुझको
कब
समझा
इक
लड़की
को
छोड़ा
मैंने
तो
इक
लड़की
ने
मुझको
आज
मैं
जैसी
करनी
वैसी
भरनी
का
मतलब
समझा
- Ayush Aavart
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चलो
करके
देखेंगे
इज़हार
अब
की
मुहब्बत
न
होगी
अदावत
तो
होगी
Tiwari Jitendra
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मोहब्बत
में
नहीं
है
फ़र्क़
जीने
और
मरने
का
उसी
को
देख
कर
जीते
हैं
जिस
काफ़िर
पे
दम
निकले
Mirza Ghalib
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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यानी
अब
उसकी
मुहब्बत
का
हलफ़
माँगूँ
मैं
यानी
अब
सुर्ख़
लबों
पे
मैं
सियाही
फेंकूँ
anupam shah
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दूजा
इश्क़
किया
तो
ये
मालूम
हुआ
पहले
वाले
में
भी
ग़लती
मेरी
थी
Tanoj Dadhich
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कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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चार
के
बाद
तीन
कहना
था
और
फिर
कर
यक़ीन
कहना
था
कहा
हमने
अना
परस्त
उसे
जिस
जगह
नाज़नीन
कहना
था
अपने
आप
उसने
रक्खे
होंठ
पे
होंठ
हमने
तो
तब
जबीन
कहना
था
अब
समझ
आया
एक
ज़रिया
थी
ज़िंदगी
को
मुईन
कहना
था
उसी
महफ़िल
में
एक
को
नादान
दूसरे
को
हसीन
कहना
था
टूट
जाता
तिलिस्म
सहरा
का
पानी
को
बस
ज़मीन
कहना
था
सामने
आता
सब
मगस
का
सच
लाओ
इक
ख़ुर्द-बीन
कहना
था
वो
था
यार
एक
अहमकों
का
दयार
हर
किसी
को
ज़हीन
कहना
था
दोस्त
को
मतलबी
कहा
तुमने
दोस्त
को
दिल
नशीन
कहना
था
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Ayush Aavart
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वैसे
तो
प्यार
से
हर
शक्ल
में
ढल
जाता
है
पर
मेरे
सामने
वो
शख़्स
बदल
जाता
है
चाहता
है
कि
ख़मोशी
से
रहूँ
महफ़िल
में
जाने
क्यूँ
कुछ
मेरा
कहना
उसे
खल
जाता
है
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Ayush Aavart
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सब
कुछ
ग़लत
मैंने
किया
सब
कुछ
किया
तुमने
सही
तुम
ठीक
ही
कहती
हो
कोई
काम
का
ही
मैं
नहीं
Ayush Aavart
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एक
दो
का
तो
ये
कहना
था
मुझे
छोड़ते
वक़्त
मैं
मुहब्बत
तो
तुम्हारी
हूँ
मगर
पहली
नहीं
Ayush Aavart
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होश
में
हूँ
ये
कोई
भूल
नहीं
देख
तो
फूल
है
बबूल
नहीं
ऐसे
इज़हार
करना
रूल
नहीं
देने
को
मेरे
पास
फूल
नहीं
जान
लो
दिल
के
क़ायदे
कानून
छूना
पर
तोड़ना
उसूल
नहीं
साथ
जीना
पसंद
है
उसको
साथ
मरना
उसे
क़ुबूल
नहीं
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Ayush Aavart
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