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Ashraf Ali
baat aage badh chuki hai bas zaraa si baat par
baat aage badh chuki hai bas zaraa si baat par | बात आगे बढ़ चुकी है बस ज़रा सी बात पर
- Ashraf Ali
बात
आगे
बढ़
चुकी
है
बस
ज़रा
सी
बात
पर
उँगलियाँ
उठने
लगी
हैं
अब
हमारी
ज़ात
पर
अपनी
मर्ज़ी
के
मुताबिक़
ही
तुम्हें
करता
हूँ
याद
मैं
ने
क़ाबू
पा
लिया
है
नफ़्स
पर
जज़्बात
पर
- Ashraf Ali
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मोहब्बत
नेक-ओ-बद
को
सोचने
दे
ग़ैर-मुमकिन
है
बढ़ी
जब
बे-ख़ुदी
फिर
कौन
डरता
है
गुनाहों
से
Arzoo Lakhnavi
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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हस्ती
का
नज़ारा
क्या
कहिए
मरता
है
कोई
जीता
है
कोई
जैसे
कि
दिवाली
हो
कि
दिया
जलता
जाए
बुझता
जाए
Nushur Wahidi
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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मैं
हो
गया
हूँ
क़ैद
हज़ारों
रिवाज़
में
मुझको
मेरी
ही
ज़ात
ने
फलने
नहीं
दिया
shaan manral
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ये
हुनर
रब
ने
मेरी
ज़ात
में
रक्खा
हुआ
है
अच्छे
अच्छो
को
भी
औक़ात
में
रक्खा
हुआ
है
Fareeha Naqvi
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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दुनिया
मेरी
बला
जाने
महँगी
है
या
सस्ती
है
मौत
मिले
तो
मुफ़्त
न
लूँ
हस्ती
की
क्या
हस्ती
है
Fani Badayuni
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तमाम
फ़र्क़
मोहब्बत
में
एक
बात
के
हैं
वो
अपनी
ज़ात
का
नईं
है
हम
उस
की
ज़ात
के
हैं
Pallav Mishra
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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तुम
बिन
शायद
जी
न
पाऊँ
ऐसा
पहले
लगता
था
लेकिन
अब
भी
ज़िंदा
हूँ,
यानी
भ्रम
था,
टूट
गया
Ashraf Ali
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निकम्में
हुक्मरानों
की
सलामी
छोड़
दी
मैंने
सो
अब
आज़ाद
हूँ
यानी
गुलामी
छोड़
दी
मैंने
Ashraf Ali
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रोज़
खोता
हूँ
ख़यालों
में
तुम्हारी
जानाँ
रोज़
धुँधली
हुई
तस्वीर
उभर
आती
है
Ashraf Ali
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है
नाज़
मुझको
आप
मेरे
राब्ते
में
हैं
मेरे
भी
हिस्से
आ
गए
कुछ
शानदार
लोग
ज़िंदादिली
का
ज़िक्र
कहीं
हो
रहा
हो
तो
सुनते
ही
याद
आते
हैं
बचपन
के
यार
लोग
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Ashraf Ali
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शाख़
पे
गुल
कभी
खिले
ही
नहीं
चाक
दिल
भी
कभी
सिले
ही
नहीं
एक
ही
शहर
में
हैं
हम
दोनों
फिर
भी
बरसों
हुए,
मिले
ही
नहीं
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Ashraf Ali
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