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Shoonya
aisi lagti hai tere chehre ki ye jhoothi hañsi
aisi lagti hai tere chehre ki ye jhoothi hañsi | ऐसी लगती है तेरे चेहरे की ये झूठी हँसी
- Shoonya
ऐसी
लगती
है
तेरे
चेहरे
की
ये
झूठी
हँसी
काग़ज़ी
हो
फूल
ज्यूँ
बस
घर
सजाने
के
लिए
- Shoonya
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रखते
हैं
मोबाइल
में
मोहब्बत
की
निशानी
अब
फूल
किताबों
में
छुपाया
नहीं
करते
Meharban Amrohvi
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किस
काम
के
वो
फूल
जो
सबने
दिए
मुझे
बेहतर
है
तेरे
हाथ
का
ख़ंजर
लगे
मुझे
Vikram Sharma
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
Aks samastipuri
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लम्स
उसका
इस
क़दर
महसूस
होता
है
मुझे
हो
कोई
नाराज़
तितली
फूल
पर
बैठी
हुई
फ़िल्म
में
शायद
बिछड़ने
का
कोई
अब
सीन
है
और
मेरे
हाथ
को
वो
थाम
कर
बैठी
हुई
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Sunny Seher
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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हम
उनके
निकाले
हुए
लोगों
में
हैं
शामिल
हर
हाल
में
जीने
का
सलीक़ा
हमें
मालूम
वो
फूल
जो
तोड़े
गए
इज़हार
की
ख़ातिर
आते
हुए
किस
किस
ने
है
रौंदा
हमें
मालूम
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Amrendra Vishwakarma
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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गुलशन
से
कोई
फूल
मुयस्सर
न
जब
हुआ
तितली
ने
राखी
बाँध
दी
काँटे
की
नोक
पर
Unknown
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फिर
नज़र
में
फूल
महके
दिल
में
फिर
शमएँ
जलीं
फिर
तसव्वुर
ने
लिया
उस
बज़्म
में
जाने
का
नाम
Faiz Ahmad Faiz
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यार
मेरे
न
तुम
इस
क़दर
चुप
रहो
पंछी
मरने
लगे
तुम
अगर
चुप
रहो
बात
करता
था
ग़ुस्से
में
मरने
की
मैं
कहती
थी
वो
मुझे
डाँट
कर
चुप
रहो
दर्द
आवाज़
में
ला
के
क्या
फ़ाइदा
ख़ामुशी
में
दिखाओ
असर
चुप
रहो
फिर
वही
होंगे
झगड़े
पुराने
सभी
फ़ायदा
कुछ
नहीं
लौटकर
चुप
रहो
आएगा
अब
नहीं
वो
पलट
कर
कभी
चीख़ते
क्यूँ
हो
दीवार-ओ-दर
चुप
रहो
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Shoonya
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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हम
जब
जब
भी
यार
गली
में
आते
हैं
देख
के
सब
पागल
पागल
चिल्लाते
हैं
एक
गुलाब
थमा
कर
मना
लिया
हमको
औरों
को
तो
तोहफ़े
भी
भिजवाते
हैं
उदास
चेहरों
का
दुख
छिपाने
को
हम
हँसी
ख़ुशी
के
फिल्टर
रोज़
लगाते
हैं
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Shoonya
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रहगुज़र
कोई
नहीं
है
रहनुमा
कोई
नहीं
इस
सफ़र
में
रुकने
की
भी
है
जगह
कोई
नहीं
तुझको
मिल
तो
जाएँगे
अब
हम-सफ़र
यूँँ
तो
कई
इस
उदासी
का
मगर
मेरे
सिवा
कोई
नहीं
यार
सुख
से
अपनी
तो
बनती
नहीं
और
फिर
यहाँ
दुख
ने
भी
मुझको
पराया
कर
दिया
कोई
नहीं
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