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Arohi Tripathi
hawa ka raushni se raabta nahin rahana jaane kyuuñ kaha ki vaasta nahin raha
hawa ka raushni se raabta nahin rahana jaane kyuuñ kaha ki vaasta nahin raha | हवा का रौशनी से राब्ता नहीं रहा
- Arohi Tripathi
हवा
का
रौशनी
से
राब्ता
नहीं
रहा
न
जाने
क्यूँ
कहा
कि
वास्ता
नहीं
रहा
- Arohi Tripathi
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वो
सर्दियों
की
धूप
की
तरह
ग़ुरूब
हो
गया
लिपट
रही
है
याद
जिस्म
से
लिहाफ़
की
तरह
Musavvir Sabzwari
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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रौशनी
आधी
इधर
आधी
उधर
इक
दिया
रक्खा
है
दीवारों
के
बीच
Obaidullah Aleem
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घर
में
ठंडे
चूल्हे
पर
अगर
ख़ाली
पतीली
है
बताओ
कैसे
लिख
दूँ
धूप
फागुन
की
नशीली
है
Adam Gondvi
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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चिलचिलाती
धूप
है
और
पैर
में
चप्पल
नहीं
जिस्म
घाइल
है
मगर
ये
हौसला
घाइल
नहीं
Tanoj Dadhich
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रोशनी
बढ़ने
लगी
है
शहर
की
चाँद
छत
पर
आ
गया
है
देखिए
Divy Kamaldhwaj
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वो
जिसपर
उसकी
रहमत
हो
वो
दौलत
मांगता
है
क्या
मोहब्बत
करने
वाला
दिल
मोहब्बत
मांगते
है
क्या
तुम्हारा
दिल
कहे
जब
भी
उजाला
बन
के
आ
जाना
कभी
उगता
हुआ
सूरज
इज़ाज़त
मांगता
है
क्या
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Ankita Singh
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हर
इक
मकाँ
में
जला
फिर
दिया
दिवाली
का
हर
इक
तरफ़
को
उजाला
हुआ
दिवाली
का
Nazeer Akbarabadi
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रिश्तों
की
ये
नाज़ुक
डोरें
तोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं,
अपनी
आँखें
दुखती
हों
तो
फोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
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Subhan Asad
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यार
समझो
मिरी
बात
को
तुम
ख़फ़ा
हो
मगर
हम
नहीं
Arohi Tripathi
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हमें
कुछ
दिन
नहीं
अब
यार
परमानेंट
रहना
है
तुम्हारे
ज़िस्म
में
जैसे
कि
कोई
सेंट
रहना
है
Arohi Tripathi
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रात
के
आठ
बज
गया
जानी
नींद
आनी
नहीं
तुम्हारे
बिन
Arohi Tripathi
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मेरे
पैरों
की
पायल
से
कभी
घाइल
हुआ
था
वो
मेरी
आँखों
की
हरक़त
से
कभी
पागल
हुआ
था
वो
उसे
जब
याद
आएगा
करेगा
बात
वो
ख़ुद
से
इसी
वो
सोच
में
होगा
कभी
बेकल
हुआ
था
वो
परेशाँ
भी
मेरा
होना
समझ
से
बेमुनासिब
था
लगी
है
लत
शराबों
की
कभी
अफ़ज़ल
हुआ
था
वो
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Arohi Tripathi
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क्या
करूँँगा
ज़रा
कहो
जानी
पास
मेरे
ही
तुम
रहो
जानी
Arohi Tripathi
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