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Arohi Tripathi
phir mujhe yaad aa rahe ho tum
phir mujhe yaad aa rahe ho tum | फिर मुझे याद आ रहे हो तुम
- Arohi Tripathi
फिर
मुझे
याद
आ
रहे
हो
तुम
क्यूँ
दुबारा
सता
रहे
हो
तुम
आग
तुमने
लगाई
थी
मुझ
में
आग
ख़ुद
ही
बुझा
रहे
हो
तुम
अब
मोहब्बत
कभी
नहीं
करनी
जीते
जी
ये
सिखा
रहे
हो
तुम
मैं
भटक
कर
कहाँ
को
जाऊँगी
यार
जानी
हुदा
रहे
हो
तुम
- Arohi Tripathi
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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कितनी
उजलत
में
मिटा
डाला
गया
आग
में
सब
कुछ
जला
डाला
गया
Manish Shukla
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क्या
बोला
मुझे
ख़ुद
को
तुम्हारा
नहीं
कहना
ये
बात
कभी
मुझ
सेे
दुबारा
नहीं
कहना
ये
हुक़्म
भी
उस
जान
से
प्यारे
ने
दिया
है
कुछ
भी
हो
मुझे
जान
से
प्यारा
नहीं
कहना
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Ali Zaryoun
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पूछा
जो
उन
सेे
चाँद
निकलता
है
किस
तरह
ज़ुल्फ़ों
को
रुख़
पे
डाल
के
झटका
दिया
कि
यूँँ
Arzoo Lakhnavi
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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मैं
क्या
करूँँ
मेरी
बेगम
सुहाग
ढूँढे
है
मेरे
बुझे
हुए
चूल्हे
में
आग
ढूँढ़े
है
वो
दिन
गए
कि
उड़ाते
थे
फ़ाख़्ताएँ
हम
सपेरा
चूहे
के
इक
बिल
में
नाग
ढूँढे
है
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Paplu Lucknawi
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वो
आँखें
आपके
ग़म
में
नहीं
हुई
हैं
नम
दिया
जलाते
हुए
हाथ
जल
गया
होगा
Shadab Javed
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हम
ही
में
थी
न
कोई
बात
याद
न
तुम
को
आ
सके
तुम
ने
हमें
भुला
दिया
हम
न
तुम्हें
भुला
सके
Hafeez Jalandhari
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दुनिया
ने
तजरबात-ओ-हवादिस
की
शक्ल
में
जो
कुछ
मुझे
दिया
है
वो
लौटा
रहा
हूँ
मैं
Sahir Ludhianvi
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न
रूई
हो
तो
अपने
अश्कों
से
बाती
बनाएँगे
बुझा
दीया
हमारा
तो
हवा
से
लड़
भी
जाएँगे
बनाई
रोज़
चौदह
साल
रंगोली
बस
इस
ख़ातिर
न
जाने
रामजी
वनवास
से
कब
लौट
आएंँगे
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Krishnakant Kabk
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दर्द
में
और
ये
मुसीबत
भी
जान
पर
आ
गई
मोहब्बत
भी
कौन
हूँ
मैं
सवाल
करता
है
अब
नहीं
है
तिरी
ज़रूरत
भी
इश्क़
क्या
एक
दिन
कि
होती
है
देख
ली
इश्क़
की
हक़ीक़त
भी
क्या
से
क्या
हो
गए
तिरी
ख़ातिर
क्यूँ
नहीं
आ
रही
क़यामत
भी
छोड़
अब
दूरियाँ
बनाते
हैं
रोकता
है
हमें
शरीयत
भी
टूट
जाए
अगर
भरोसा
तो
काम
आती
नहीं
नसीहत
भी
पूछते
हो
कि
हाल
कैसा
है
ठीक
लगती
नहीं
तबीयत
भी
यार
मोमिन
हमें
बताओ
तो
इश्क़
राहत
भी
दे
अज़ियत
भी
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Arohi Tripathi
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हो
नहीं
सकती
कभी
लाचार
औरत
चुप
कहाँ
रहती
ही
जब
हो
चार
औरत
मर्द
ने
समझा
जिसे
कमज़ोर
हिस्सा
मर्द
के
ख़ातिर
बनी
दीवार
औरत
एक
औरत
से
हुई
तख़लीक़
जिसकी
और
मर्दों
ने
किया
मिस्मार
औरत
जो
कभी
सीता
कभी
राधा
बनी
थी
नूर
सी
फैली
हुई
घर
बार
औरत
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Arohi Tripathi
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आप
के
हम
बड़े
दिवाने
हैं
आप
के
होंठ
काट
खाने
हैं
Arohi Tripathi
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क्या
ही
बताऊँ
मैं
तुम्हें
क्या
हाल
था
मेरा
उसने
लबों
को
चूम
के
हालत
ख़राब
की
Arohi Tripathi
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काम
सारे
यार
जानी
कर
रहा
दोस्ती
में
बदगुमानी
कर
रहा
लिख
दिए
थे
लफ़्ज़
मैंने
प्यार
के
वो
उसे
फिर
से
कहानी
कर
रहा
पड़
गया
है
बे
हयाई
में
सनम
ख़ुश्क
वो
अपनी
जवानी
कर
रहा
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Arohi Tripathi
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