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Arohi Tripathi
ha
ha | हमें बदनाम करने में लगे हैं
- Arohi Tripathi
हमें
बदनाम
करने
में
लगे
हैं
यही
बस
काम
करने
में
लगे
हैं
सुना
है
गाँव
आए
राम
मेरे
इसे
हम
धाम
करने
में
लगे
हैं
बड़े
लोगों
कि
ख़्वाहिश
आप
जानी
यहाँ
सब
नाम
करने
में
लगे
हैं
- Arohi Tripathi
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तुम
माँग
रहे
हो
मेरे
दिल
से
मेरी
ख़्वाहिश
बच्चा
तो
कभी
अपने
खिलौने
नहीं
देता
Abbas Tabish
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मेरी
ख्वाहिश
है
कि
तुझे
फूलों
से
फतह
करूँ
वरना
ये
काम
तो
तलवार
भी
कर
सकती
है
Azhar Faragh
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हज़ारों
ख़्वाहिशें
ऐसी
कि
हर
ख़्वाहिश
पे
दम
निकले
बहुत
निकले
मिरे
अरमान
लेकिन
फिर
भी
कम
निकले
Mirza Ghalib
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क्या
हुआ
जो
मुझे
हम-उम्र
मोहब्बत
न
मिली
मेरी
ख़्वाहिश
भी
यही
थी
कि
बड़ी
आग
लगे
Muzdum Khan
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तुझे
ख़याल
नहीं
है
सो
हम
बढ़ा
रहे
हैं
फिर
इक
दफ़ा
तेरी
ज़ानिब
क़दम
बढ़ा
रहे
हैं
बहुत
से
आए
तुझे
जीतने
की
ख़्वाहिश
में
हम
एक
कोने
में
बैठे
रक़म
बढ़ा
रहे
हैं
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Zahid Bashir
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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ख़्वाहिश
सुखाने
रक्खी
थी
कोठे
पे
दोपहर
अब
शाम
हो
चली
मियाँ
देखो
किधर
गई
Adil Mansuri
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मदमस्त
महकते
फूलों
को
इन
कलियों
को
चूमा
जाए
इक
ख़्वाहिश
मेरी
यह
भी
है
तेरी
गलियों
में
घूमा
जाए
Akash Rajpoot
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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कौन
देखे
मिरी
तरफ़
जानी
देख
लें
जब
तिरी
तरफ़
जानी
Arohi Tripathi
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चाँद
निकला
नहीं
मोहब्बत
का
ईद
कैसे
मना
लिया
तुमने
Arohi Tripathi
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मोहब्बत
हो
गई
बदनाम
जानी
मचा
है
शहर
में
कोहराम
जानी
Arohi Tripathi
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जिसको
जन्नत
बुलाया
जाता
है
माँ
के
क़दमों
में
पाया
जाता
है
Arohi Tripathi
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शाहज़ादे
पता
नहीं
तुम
को
तुम
पे
कितनी
कनीज़
मरती
हैं
Arohi Tripathi
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