KHvaabon ka hai vo shamshaan samjhti hai | ख़्वाबों का है वो शमशान समझती है

  - Prashant Arahat
ख़्वाबोंकाहैवोशमशानसमझतीहै
मेरेदिलकोवोवीरानसमझतीहै
कॉलबिज़ीहोतबकहतीथीमौसीथीं
याररक़ीबोंकोवोजानसमझतीहै
अपनेलहजेकीछेनीसेबारकिया
मेरेदिलकोवोचट्टानसमझतीहै
बापनेउसकोशहरमेंपढ़नेभेजाहै
सिगरेटकोवोअपनीशानसमझतीहै
ग़ज़लोंमेंमैंनेभीगालीलिक्खीहैं
वोउनकोअपनागुणगानसमझतीहै
  - Prashant Arahat
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