jism ko chadar banaya hi nahin | जिस्म को चादर बनाया ही नहीं

  - Prashant Arahat
जिस्मकोचादरबनायाहीनहीं
रातभरदीपकबुझायाहीनहीं
फ़र्ज़उसकोजोनिभानाचाहिए
वोकभीउसनेनिभायाहीनहीं
हालदिलकासबकहाहैशे'रमें
राज़कुछउनसेेछुपायाहीनहीं
जोकहाथाशे'रउनकेवास्ते
वोकभीउनकोसुनायाहीनहीं
मैंबहुतहीचाहताउसकोरहा
परकभीउसकोबतायाहीनहीं
बाँटलेतेआपकेहमदर्द-ओ-ग़म
आपनेअपनाबनायाहीनहीं
  - Prashant Arahat
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