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Aniket
safar
safar | "सफ़र"
- Aniket
"सफ़र"
मन
में
जिज्ञासा
लिए
रात
भर
ना
सोया
था
सफ़र
शुरू
होने
से
पहले
उसके
ख़्यालों
में
खोया
था
सुब्ह
हुआ
उत्सुक्ता
का
न
था
कोई
ठिकाना
श्री
गणेश
किया
सफ़र
का
मैंने
बस
अब
मंज़िल
को
था
बस
पाना
पहुँचा
स्टेशन
सुबह-सुबह
जल्दी
से
मैंने
टिकट
कटाई
वहीं
कहानी
भारतीय
रेल
की
फिर
समय
से
ट्रेन
न
आईं
शुरु
हुआ
मेरा
सफ़र
अब
वो
मंज़िल
का
रहा,
न
घर
का
बीच
राह
पर
चल
रहा
हूँ
हूँ
तो
केवल
अब
सफ़र
का
भारतीय
सफ़र
में
पाया
एक
अनोखा
अहसास
कहने
को
लोग
अनजान
थे
पर
लग
रहे
थे
सभी
अपने
लिए
खास
सफ़र
का
अकेलापन
मिटाने
चला
लोगों
में
मेरा
संवाद
कहीं
मिल
रही
थी
लोगों
की
बाते
कहीं
हो
रहे
थे
वाद
विवाद
और
विवादपद
माहौल
बना
पर
छड़ो
में
परिणाम
सामने
आए
बाते
थी
वृदाजनो
की
जिन
में
जीवन
के
रहस्य
समाए
यात्रा
अब
मेरी
रोचक
हुई
सूनापन
अब
दूर
भगा
परायो
सा
लग
रहा
था
जो
कल
लोगों
ने
अपनापन
का
उस
में
समा
बाँधा
ख़त्म
हुई
गंभीर
मुद्दे
अब
हसीं
ठहाके
लगाए
गए
हृदयस्पशृक
था
वो
पल
जब
लोगों
के
ग़म
भगाए
गए
मंज़िल
थी
मेरी
पास
मगर
उसे
पाने
का
न
अब
मन
था
इतने
तजुर्बे
संजोए
मैंने
उस
एक
सफ़र
में
सारा
जीवन
था
मंज़िल
को
था
अब
पा
चुका
सफ़र
मेरा
कारगार
रहा
सफ़र
ख़ुबसूरत
था
मंज़िल
से
मेरी
सारा
सफ़र
यादगार
रहा
- Aniket
मेरी
हर
बात
बे-असर
ही
रही
नक़्स
है
कुछ
मिरे
बयान
में
क्या
Jaun Elia
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तन्हा
ही
सही
लड़
तो
रही
है
वो
अकेली
बस
थक
के
गिरी
है
अभी
हारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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उन्हीं
रास्तों
ने
जिन
पर
कभी
तुम
थे
साथ
मेरे
मुझे
रोक
रोक
पूछा
तिरा
हम-सफ़र
कहाँ
है
Bashir Badr
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उसे
पागल
बनाती
फिर
रही
हो
जिसे
शौहर
बनाना
चाहिए
था
Arvind Inaayat
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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बंद
कमरा,
सर
पे
पंखा,
तीरगी
है
और
मैं
एक
लड़ाई
चल
रही
है
ज़िंदगी
है
औऱ
मैं
Shadab Asghar
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सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
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निगाहें
फेर
ली
घबरा
के
मैंने
वो
तुम
से
ख़ूब-सूरत
लग
रही
थी
Fahmi Badayuni
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सिवा
इसके
कुछ
अच्छा
ही
नहीं
लगता
है
शामों
में
सफ़र
कैसा
भी
हो
घर
को
परिंदे
लौट
जाते
हैं
Aarush Sarkaar
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