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Ankit
mere sapnon ki ek numaish ho
mere sapnon ki ek numaish ho | मेरे सपनों की एक नुमाइश हो
- Ankit
मेरे
सपनों
की
एक
नुमाइश
हो
तुम
मेरी
सब
सेे
प्यारी
ख़्वाहिश
हो
चाहती
है
वो,
जल्दी
घर
जाना
चाहता
हूँ
मैं,
जल्दी
बारिश
हो
- Ankit
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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बारिश
हो
जाने
के
बाद
भी
मिट्टी
गीली
रहती
है
मैं
तेरे
जाने
के
बाद
भी
तुझ
सेे
बातें
करता
हूँ
Siddharth Saaz
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ख़ुश्बू
की
बरसात
नहीं
कर
पाते
हैं
हम
ख़ुद
ही
शुरुआत
नहीं
कर
पाते
हैं
जिस
लड़की
की
बातें
करते
हैं
सब
सेे
उस
लड़की
से
बात
नहीं
कर
पाते
हैं
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Gyan Prakash Akul
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
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Dev Niranjan
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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कमरे
से
वो
बारिश
कैसे
देखेगी
कमरे
में
इक
खिड़की
भी
बनवानी
थी
Sarul
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दूर
तक
छाए
थे
बादल
और
कहीं
साया
न
था
इस
तरह
बरसात
का
मौसम
कभी
आया
न
था
Qateel Shifai
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देख
कैसे
धुल
गए
है
गिर्या-ओ-ज़ारी
के
बाद
आसमाँ
बारिश
के
बाद
और
मैं
अज़ादारी
के
बाद
इस
सेे
बढ़
कर
तो
तुझे
कोई
हुनर
आता
नहीं
सोचता
हूँ
क्या
करेगा
दिल
आज़ारी
के
बाद
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Abbas Tabish
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मैं
ख़ुशी
से
कर
लेता,
खुद-कुशी,
कई
सौ
बार
मुझ
को
खा
गया
घर
का
ख़्याल
भी,
उन्हीं
सौ
बार
Ankit
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आशिक़ी
को
पढ़ने
में
पूरा
साल
लगता
है
और
फ़ैल
होने
में
इक
सवाल
लगता
है
अच्छा
लगता
है
जब
तू
हँसके
देखता
है,पर
जब
भी
देखकर
हँसता
है
कमाल
लगता
है
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Ankit
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जैसे
उस
एक
दिए
ने
रात
का
ख़्याल
रखा
है
मेरे
सन्नाटों
को
तेरी
आवाज़
ने
संभाल
रखा
है
Ankit
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उसकी
बातें
इतनी
मीठी
लगती
है
फिर
हमारी
चाय
फ़ीकी
लगती
है
Ankit
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क्यूँँ
है
तू
ऐसे
खफ़ा
क्या
ग़म
है
आ
इधर
बैठ
बता
क्या
ग़म
है
कोई
भी
तो
तेरी
जानिब
है
नहीं
फिर
यहाँ
कैसा
मज़ा
क्या
ग़म
है
वो
रिझाता
नहीं
है
क्यूँँं
मुझको
उसको
भी
तो
है
पता
क्या
ग़म
है
जन्मदिन
पे
यूँँ
ही
ख़ुश
हैं
ये
लोग
जन्म
लेने
से
बड़ा
क्या
ग़म
है
उसको
ये
ग़म
है
कि
मैं
हूँ
ग़मगीन
इस
सेे
प्यारा-ओ-भला
क्या
ग़म
है
हमने
सोचा
था
ख़सारा
होगा
हो
गया
उल्टा
नफ़ा
क्या
ग़म
है
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Ankit
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