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Anas Khan
hai zaroori shaayaron ki aankh men aañsu rahe
hai zaroori shaayaron ki aankh men aañsu rahe | है ज़रूरी शायरों की आँख में आँसू रहे
- Anas Khan
है
ज़रूरी
शायरों
की
आँख
में
आँसू
रहे
खिलखिलाने
से
हमारे
दिन
नहीं
बनते
मियाँ
- Anas Khan
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कबूतर
इश्क़
का
उतरे
तो
कैसे?
तुम्हारी
छत
पे
निगरानी
बहुत
है
इरादा
कर
लिया
गर
ख़ुद-कुशी
का
तो
ख़ुद
की
आँख
का
पानी
बहुत
है
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Kumar Vishwas
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कमाल
ये
है
मुझे
देखती
हैं
वो
आँखें
मलाल
ये
है
उन्हें
देखना
नहीं
आता
Dilawar Ali Aazar
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तुम
मेरी
तरफ़
देखना
छोड़ो
तो
बताऊँ
हर
शख़्स
तुम्हारी
ही
तरफ़
देख
रहा
है
Waseem Barelvi
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देर
तक
आँख
मुसीबत
में
पड़ी
रहती
है
तुम
चले
जाते
हो,
तस्वीर
बनी
रहती
है
Fauziya Rabab
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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नज़र
आए
न
तू
जिनको
परेशानी
से
मरते
हैं
जो
तुझको
देख
लेते
हैं
वो
हैरानी
से
मरते
हैं
Varun Anand
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शाम
थी
हिज्र
की
हाल
मत
पूछना
आँख
थकने
लगे
तो
जिगर
रो
पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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लग
गई
मुझको
नज़र
बेशक़
तुम्हारी
आईनों
मैं
बहुत
ख़ुश
था
किसी
इक
सिलसिले
से
उन
दिनों
Aarush Sarkaar
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फिर
नज़र
में
फूल
महके
दिल
में
फिर
शमएँ
जलीं
फिर
तसव्वुर
ने
लिया
उस
बज़्म
में
जाने
का
नाम
Faiz Ahmad Faiz
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अगर
मर्द
हो
तो
वफ़ा
करनी
होगी
मियाँ
बे-वफ़ाई
पे
औरत
का
हक़
है
Anas Khan
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कौन
समझे
इश्क़
में
बर्बाद
का
ग़म
मार
देता
है
किसी
की
याद
का
ग़म
हिज्र
में
जब
दर्द
से
वाक़िफ़
हुए
हम
तब
समझ
आने
लगा
फ़रहाद
का
ग़म
बेड़ियाँ
जिस
दिन
खुलीं
ये
जान
लोगे
है
असीरों
से
बड़ा
आज़ाद
का
ग़म
फिर
क़फ़स
में
लौट
आओ
ऐ
परिंदों
यार
समझो
तो
ज़रा
सय्याद
का
ग़म
आपने
तो
जौन
के
बस
शे'र
देखे
आप
समझे
ही
नहीं
उस्ताद
का
ग़म
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Anas Khan
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बाद
मुश्किल
के
जाने
लगे
हैं
अब
कहीं
ग़म
ठिकाने
लगे
हैं
छोड़
देना
था
इक
पल
का
क़िस्सा
भूलने
में
ज़माने
लगे
हैं
ऐसी
आदत
लगी
है
कि
आँसू
अब
ख़ुशी
में
भी
आने
लगे
हैं
झूठ
उनका
जो
पकड़ा
गया
है
अब
वो
रो
के
दिखाने
लगे
हैं
आप
ही
से
तो
रूठे
थे
हम
क्यूँँ
आप
ही
को
मनाने
लगे
हैं
देख
खु़द
जो
मुनाफ़िक़
हैं
वो
भी
हमको
सजदे
सिखाने
लगे
हैं
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Anas Khan
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मैंने
ग़मों
को
ओढ़
के
रातें
बिताई
हैं
दिन
का
लिबास
था
जो
मेरा
आपका
था
ग़म
Anas Khan
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अपनी
रज़ा
अपनी
सहूलत
के
लिए
रिश्ता
रखा
था
बस
ज़रुरत
के
लिए
बिखरे
हुए
दिल
दे
उसे
ये
बद्दुआ
वो
उम्र
भर
तरसे
मुहब्बत
के
लिए
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Anas Khan
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