shaam aate hi gham nikalta hai | शाम आते ही ग़म निकलता है

  - Anas Khan
शामआतेहीग़मनिकलताहै
साथसूरजकेदिलभीढलताहै
मौतआतीहैख़ुश-नसीबोंको
मेरेजैसोंकोग़मनिगलताहै
छोटेबच्चोंसाहैमेरादिलभी
कुछनहींकहताबसमचलताहै
कैसेबीतेगीज़िंदगीतुमबिन
सोचनेपरहीदमनिकलताहै
हारजातीहैंधड़कनेंअक्सर
इश्क़साँसोंसेतेज़चलताहै
मुस्कुराताहैजबकोईअपना
मेरेसीनेकाज़ख़्मजलताहै
तुझकोग़ैरोंकेसाथदेखूँतो
ज़ख़्मभरनेकेबादजलताहै
मिटहीजाएगाग़मभीसीनेका
उम्रभरकौनसाथचलताहै
  - Anas Khan
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